पटियाला ने रचा इतिहास, देश का पहला AI-पावर्ड रेल इंजन तैयार, खतरे से पहले देगा चेतावनी???

पटियाला में देश का पहला AI-पावर्ड रेल इंजन तैयार, खतरे से पहले देगा चेतावनी...

पटियाला: भारतीय रेलवे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम सामने आया है। पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स (PLW) ने देश का पहला AI-पावर्ड रेल इंजन तैयार किया है। इस लोकोमोटिव को इस तरह विकसित किया गया है कि यह चलते समय रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन (OHE) और ट्रैक से जुड़े संभावित खतरों की निगरानी कर सके।

रिपोर्ट के मुताबिक इस इंजन का नंबर 39642 है। इसमें AI आधारित OHE मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है, जो सेंसर से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण करके संभावित खराबियों और जोखिमों की पहचान करने में मदद करेगा।

खराबी आने से पहले मिलेगी चेतावनी

इस AI सिस्टम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह केवल खराबी होने के बाद उसकी जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा। सिस्टम ओवरहेड उपकरणों और ट्रैक से जुड़े संकेतों का लगातार विश्लेषण करके संभावित समस्या का पहले पता लगाने में मदद करेगा।

उदाहरण के तौर पर बिजली की ओवरहेड लाइन में स्पार्किंग, तार के ढीले होने या किसी उपकरण में खराबी के संकेत मिलने पर सिस्टम संबंधित रेलवे कर्मचारियों को समय रहते अलर्ट करने में सक्षम होगा। इससे मेंटेनेंस टीम को समस्या के स्थान तक पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।

ट्रैक और OHE की लाइव निगरानी

AI-पावर्ड इंजन में सेंसर और लाइव मॉनिटरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसका उद्देश्य ट्रेन के परिचालन के दौरान रेलवे के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर लगातार नजर रखना है।

सिस्टम से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर संभावित तकनीकी समस्या की पहचान की जा सकती है। इससे रेलवे को डेटा आधारित और पूर्वानुमानित रखरखाव (Predictive Maintenance) की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।

पक्षियों के घोंसले और पेड़-पौधों की भी पहचान

रिपोर्ट के अनुसार AI आधारित सिस्टम केवल विद्युत उपकरणों की निगरानी तक सीमित नहीं है। यह OHE के आसपास ऐसी परिस्थितियों को भी चिह्नित करने में मदद कर सकता है जो रेल परिचालन के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं।

इनमें ओवरहेड उपकरणों के खंभों पर बने पक्षियों के घोंसले और ट्रैक के आसपास बढ़े हुए पेड़-पौधों के झुरमुट जैसी चीजें शामिल हैं। समय रहते इनकी पहचान होने पर संबंधित विभाग आवश्यक कार्रवाई कर सकता है।

मेंटेनेंस में आएगा बड़ा बदलाव

रेलवे में किसी तकनीकी खराबी का समय पर पता लगाना परिचालन की सुरक्षा और समयबद्धता दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि OHE या ट्रैक से जुड़ी समस्या पहले ही सामने आ जाए तो मेंटेनेंस टीम समस्या को गंभीर होने से पहले ठीक कर सकती है।

AI आधारित सिस्टम इसी दिशा में काम करता है। सेंसर से प्राप्त जानकारी को लगातार मॉनिटर करके यह संभावित खराबी के संकेतों को पहचानने में सहायता करता है।

इससे OHE ब्रेकडाउन, ट्रेन ट्रिपिंग और परिचालन में देरी जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके पायलट संचालन और आगे के परीक्षणों के बाद किया जाएगा।

एक साल में तैयार हुआ AI इंजन

PLW के अधिकारियों के अनुसार इस इंजन को विकसित करने में करीब एक वर्ष का समय लगा। रेलवे की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऐसे चार इंजन तैयार करने के लिए कहा गया है।

इससे संकेत मिलता है कि भारतीय रेलवे AI और मशीन लर्निंग आधारित निगरानी तकनीक को चरणबद्ध तरीके से अपने परिचालन में शामिल करने पर काम कर रहा है।

भारतीय रेलवे में तेजी से बढ़ रहा AI का इस्तेमाल

AI का इस्तेमाल भारतीय रेलवे में केवल इस इंजन तक सीमित नहीं है। रेलवे ने मार्च 2026 में बताया था कि वह सुरक्षा और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए कई AI और मशीन लर्निंग आधारित तकनीकों को अपना रहा है।

इनमें Machine Vision Inspection System, Integrated Track Monitoring System, Online Monitoring of Rolling Stock और AI आधारित OHE निरीक्षण जैसी तकनीकें शामिल हैं। रेलवे IIT मद्रास के साथ ड्रोन आधारित OHE निरीक्षण पर भी काम कर रहा है।

रेलवे ने AI और डेटा आधारित तकनीकों के लिए Rail Tech Policy भी अपनाई है, जिसका उद्देश्य नई तकनीकों के विकास, परीक्षण और बड़े स्तर पर इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

रेल सुरक्षा में AI क्यों महत्वपूर्ण?

भारत में रेलवे नेटवर्क बहुत बड़ा है और हजारों ट्रेनें प्रतिदिन लंबी दूरी तय करती हैं। ऐसे में ट्रैक, OHE, सिग्नलिंग और अन्य उपकरणों की लगातार निगरानी बेहद महत्वपूर्ण है।

मानव निरीक्षण के साथ AI आधारित सिस्टम का इस्तेमाल निगरानी को अधिक लगातार और डेटा आधारित बना सकता है। सेंसर से प्राप्त बड़ी मात्रा में डेटा को मशीन लर्निंग तकनीक तेजी से प्रोसेस कर सकती है और संभावित असामान्य स्थिति की पहचान में मदद कर सकती है।

हालांकि AI मानव कर्मचारियों का पूरी तरह विकल्प नहीं है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से मानवीय निगरानी और मेंटेनेंस व्यवस्था को तकनीकी सहायता देना है।

आगे और इंजनों में इस्तेमाल की तैयारी

पटियाला में तैयार AI-पावर्ड लोकोमोटिव को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में देखा जा रहा है। यदि परीक्षणों के दौरान तकनीक प्रभावी साबित होती है, तो भविष्य में इसे दूसरे लोकोमोटिव और रेलवे नेटवर्क के अन्य हिस्सों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

इस तरह पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स का यह प्रयास भारतीय रेलवे में स्मार्ट मॉनिटरिंग, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और AI आधारित रेल सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी प्रयोग है।

निष्कर्ष

पटियाला लोकोमोटिव वर्क्स ने लोकोमोटिव 39642 में AI आधारित OHE मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया है, जो चलती ट्रेन के दौरान ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन और ट्रैक से जुड़ी संभावित समस्याओं की पहचान करने में मदद करेगा। सिस्टम का उद्देश्य खराबी होने से पहले उसके संकेतों को पहचानकर रेलवे कर्मचारियों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराना है।

यह पहल भारतीय रेलवे में AI और मशीन लर्निंग आधारित तकनीकों के बढ़ते इस्तेमाल का हिस्सा है और आने वाले समय में रेल सुरक्षा तथा पूर्वानुमानित रखरखाव के क्षेत्र में इसके व्यापक उपयोग की संभावना बनाती है।

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