भारत में तेजी से बढ़ रहे अमीर! 3 में से 1 टैक्सपेयर की सालाना कमाई ₹20 लाख से ज्यादा, 50 लाख से ऊपर कमाने वालों की संख्या भी लगभग दोगुनी ???

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था में बढ़ती आय और बदलते कमाई के तरीकों की एक नई तस्वीर सामने आई है...

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था में बढ़ती आय और बदलते कमाई के तरीकों की एक नई तस्वीर सामने आई है। देश में ज्यादा कमाई करने वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। अब हर तीन में से करीब एक टैक्सपेयर ऐसा है, जिसकी सालाना घोषित सकल आय 20 लाख रुपये से अधिक है। वहीं, 50 लाख रुपये से ज्यादा सालाना आय बताने वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी भी पिछले तीन वर्षों में लगभग दोगुनी हो गई है।

यह जानकारी ClearTax की वार्षिक रिपोर्ट How India Filed in 2026 में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, लोग अब केवल नौकरी या वेतन पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि शेयर बाजार में निवेश, ट्रेडिंग, कारोबार, फ्रीलांसिंग और दूसरे स्रोतों से भी कमाई कर रहे हैं। इससे उनकी आय के स्रोतों में विविधता आ रही है और इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का तरीका भी बदल रहा है।

हालांकि, रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े ClearTax के माध्यम से खुद रिटर्न दाखिल करने वाले लोगों के हैं। इन्हें भारत के सभी टैक्सपेयर्स या देश के सभी अमीर लोगों का पूरा आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

Personal Finance – Business Standard+1

तीन साल में 20 लाख रुपये से ज्यादा कमाने वालों की हिस्सेदारी बढ़ी

रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा 20 लाख रुपये से अधिक सालाना आय वाले टैक्सपेयर्स से जुड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, असेसमेंट ईयर 2023-24 में ऐसे टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी 22.5 प्रतिशत थी। यह बढ़कर असेसमेंट ईयर 2026-27 में 30.5 प्रतिशत हो गई है।

इसका मतलब है कि अब ClearTax के जरिए रिटर्न दाखिल करने वाले लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति की घोषित सालाना सकल आय 20 लाख रुपये से अधिक है।

इसे पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों से समझा जा सकता है:

असेसमेंट ईयर ₹20 लाख से अधिक आय वाले
AY 2023-24 22.5%
AY 2024-25 बीच के वर्षों में बढ़ोतरी
AY 2025-26 30.5% से कम
AY 2026-27 30.5%

यह बदलाव बताता है कि रिटर्न दाखिल करने वाले लोगों के बीच ऊंची आय वाले वर्ग की हिस्सेदारी बढ़ रही है।

Personal Finance – Business Standard

₹50 लाख से ज्यादा कमाने वालों की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी

रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चर्चा 50 लाख रुपये से अधिक सालाना आय वाले लोगों को लेकर है। तीन साल के दौरान इस आय वर्ग की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी हो गई है।

आंकड़ों के अनुसार:

  • असेसमेंट ईयर 2023-24 में 4.5 प्रतिशत टैक्सपेयर्स की आय 50 लाख रुपये से ज्यादा थी।

  • AY 2024-25 में यह बढ़कर 5.6 प्रतिशत हो गई।

  • AY 2025-26 में यह हिस्सेदारी 7.3 प्रतिशत तक पहुंची।

  • AY 2026-27 में बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई।

यानी तीन साल में 50 लाख रुपये से ज्यादा कमाने वाले लोगों की हिस्सेदारी 4.5 प्रतिशत से बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई। यह करीब 78 प्रतिशत की सापेक्ष वृद्धि है।

इसका अर्थ यह है कि टैक्स रिटर्न दाखिल करने वाले लोगों के बीच उच्च आय वाले वर्ग का विस्तार हो रहा है। हालांकि, इसे देश में करोड़पतियों या कुल संपत्ति वाले अमीरों की संख्या दोगुनी होने के बराबर नहीं समझना चाहिए।

Personal Finance – Business Standard

नौकरी के अलावा दूसरे स्रोतों से भी हो रही कमाई

रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। अब लोग केवल नौकरी से मिलने वाली सैलरी पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वे अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए निवेश, कारोबार, ट्रेडिंग और फ्रीलांसिंग जैसे विकल्प अपना रहे हैं।

ClearTax के आंकड़ों के मुताबिक, AY 2026-27 में 47.3 प्रतिशत सेल्फ-फाइलर्स ने रोजगार या वेतन के अलावा कम से कम एक अन्य स्रोत से आय की जानकारी दी। AY 2022-23 में यह आंकड़ा केवल 9.5 प्रतिशत था।

इसमें शामिल हैं:

  1. शेयर बाजार से होने वाली कमाई।

  2. म्यूचुअल फंड और अन्य निवेश।

  3. बिजनेस और व्यापार से होने वाली आय।

  4. फ्रीलांसिंग और ऑनलाइन काम।

  5. क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित आय।

इससे पता चलता है कि कमाई के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल और निवेश आधारित आय के विकल्प भी लोकप्रिय हो रहे हैं।

Personal Finance – Business Standard

शेयर बाजार और ट्रेडिंग से कमाई करने वालों की संख्या बढ़ी

भारत में शेयर बाजार के प्रति लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। अब बड़ी संख्या में लोग नौकरी के साथ-साथ शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग के जरिए भी कमाई करने की कोशिश कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, AY 2026-27 में 41.7 प्रतिशत सेल्फ-फाइलर्स ने कैपिटल गेन्स यानी पूंजीगत लाभ की जानकारी दी। AY 2025-26 में यह आंकड़ा 34.4 प्रतिशत और AY 2024-25 में 25.5 प्रतिशत था।

कैपिटल गेन्स में शेयर, म्यूचुअल फंड और अन्य पूंजीगत संपत्तियों की बिक्री से होने वाला लाभ शामिल हो सकता है। इसका मतलब है कि निवेश से जुड़ी आय अब टैक्स रिटर्न में पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

हालांकि, शेयर बाजार में निवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मुनाफा हो, ऐसा जरूरी नहीं है। बाजार में जोखिम भी बना रहता है।

Personal Finance – Business Standard

दो या उससे ज्यादा स्रोतों से कमाई करने वाले भी बढ़े

पहले अधिकतर लोगों की आय का मुख्य स्रोत नौकरी या अपना कारोबार होता था। लेकिन अब कई लोग एक साथ दो या उससे ज्यादा माध्यमों से कमाई कर रहे हैं।

रिपोर्ट बताती है कि AY 2022-23 में केवल 3.5 प्रतिशत सेल्फ-फाइलर्स ने दो या उससे अधिक गैर-वेतन आय स्रोतों की जानकारी दी थी। AY 2026-27 में यह हिस्सेदारी बढ़कर 24.4 प्रतिशत हो गई।

इस बदलाव के पीछे कई वजहें हो सकती हैं:

  • नौकरी के साथ फ्रीलांसिंग करना।

  • शेयर बाजार में निवेश और ट्रेडिंग।

  • ऑनलाइन बिजनेस और डिजिटल सेवाएं।

  • प्रॉपर्टी और अन्य निवेश से आय।

  • अपना छोटा कारोबार शुरू करना।

यह ट्रेंड बताता है कि भारत में लोग आय के एक ही स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय कमाई के नए रास्ते तलाश रहे हैं।

Personal Finance – Business Standard

महिलाओं की आय में भी बढ़ रही हिस्सेदारी

रिपोर्ट में महिलाओं की कमाई को लेकर भी सकारात्मक बदलाव सामने आया है। 50 लाख रुपये से ज्यादा सालाना आय बताने वाली महिला टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी में पिछले एक साल के दौरान बढ़ोतरी हुई है।

आंकड़ों के मुताबिक:

  • AY 2025-26 में 50 लाख रुपये से अधिक आय वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 3.7 प्रतिशत थी।

  • AY 2026-27 में यह बढ़कर 5.1 प्रतिशत हो गई।

  • पुरुषों में यह हिस्सेदारी 9.6 प्रतिशत से बढ़कर 12.2 प्रतिशत हुई।

वहीं, 20 लाख रुपये से अधिक आय वाले महिला टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी में सालाना आधार पर 23 प्रतिशत की सापेक्ष वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पुरुषों के मामले में यह वृद्धि 12 प्रतिशत रही।

इसके बावजूद आय के मामले में पुरुषों और महिलाओं के बीच अंतर बना हुआ है। AY 2026-27 में 20 लाख रुपये से ज्यादा आय बताने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत थी, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 42 प्रतिशत रहा।

Personal Finance – Business Standard

40 से 50 साल की उम्र में सबसे ज्यादा हाई इनकम वाले टैक्सपेयर

रिपोर्ट में उम्र के आधार पर भी आय का विश्लेषण किया गया है। इसमें 40 से 50 साल की उम्र के लोगों को सबसे ज्यादा हाई इनकम वाले वर्ग में पाया गया।

आंकड़ों के अनुसार:

उम्र ₹20 लाख से अधिक आय वाले
35 से 40 साल 38%
40 से 50 साल 44%
50 से 60 साल 36%
60 साल से अधिक 9%

इससे संकेत मिलता है कि 40 से 50 साल की उम्र के दौरान लोगों की कमाई की क्षमता अधिक होती है। इस उम्र तक कई लोग अपने करियर में अच्छी स्थिति हासिल कर चुके होते हैं और कारोबार या निवेश से भी अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि 60 साल से अधिक उम्र के लगभग 40 प्रतिशत टैक्सपेयर्स ने कैपिटल गेन्स की जानकारी दी। इससे पता चलता है कि रिटायरमेंट के बाद भी निवेश से होने वाली आय महत्वपूर्ण बनी हुई है।

Personal Finance – Business Standard

भारत में टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी

देश में केवल ज्यादा कमाने वालों की हिस्सेदारी ही नहीं बढ़ रही, बल्कि इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में भी बड़ा इजाफा हुआ है।

Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2013-14 में व्यक्तिगत आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या करीब 3.05 करोड़ थी, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर लगभग 8.09 करोड़ हो गई।

यानी करीब 11 वर्षों में व्यक्तिगत टैक्स रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में 5 करोड़ से ज्यादा की वृद्धि हुई।

इसके साथ ही 10 लाख से 50 लाख रुपये सालाना आय बताने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

Moneycontrol

क्या भारत में अमीर और ज्यादा अमीर हो रहे हैं?

इन आंकड़ों से भारत में उच्च आय वाले टैक्सपेयर्स की बढ़ती हिस्सेदारी का संकेत मिलता है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि ज्यादा सालाना आय और कुल संपत्ति दोनों अलग-अलग चीजें हैं।

किसी व्यक्ति की सालाना आय 20 लाख या 50 लाख रुपये हो सकती है, लेकिन इससे उसकी कुल संपत्ति, बचत या निवेश की सही स्थिति का पता नहीं चलता।

इसी तरह, टैक्स रिटर्न दाखिल करने वाले लोगों के आंकड़े पूरे देश की आय वितरण व्यवस्था का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इसके लिए ग्रामीण और शहरी परिवारों की आय, रोजगार, महंगाई और संपत्ति से जुड़े आंकड़ों का भी अध्ययन करना जरूरी है।

निष्कर्ष: भारत में कमाई के तरीकों में बदलाव आ रहा है। नौकरी के अलावा शेयर बाजार, बिजनेस, ट्रेडिंग और फ्रीलांसिंग से आय अर्जित करने वाले लोगों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। ClearTax की रिपोर्ट इसी बदलती आर्थिक तस्वीर को सामने रखती है।

Back to top button