3D Concrete Printed Housing Project : – आंध्र प्रदेश में भारत का पहला 3D कंक्रीट प्रिंटेड हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू, 177 घर 6 महीने में होंगे तैयार ???

आंध्र प्रदेश में भारत का पहला 3D कंक्रीट प्रिंटेड हाउसिंग प्रोजेक्ट शुरू...

गुंटूर: आंध्र प्रदेश में देश के पहले 3D कंक्रीट प्रिंटेड हाउसिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत हो गई है। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 4 अक्टूबर 2026 को गुंटूर जिले के बुर्रीपालेम गांव में इस पायलट परियोजना की आधारशिला रखी। कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू भी मौजूद रहे।

177 घरों का होगा निर्माण

इस पायलट परियोजना के तहत गुंटूर जिले के बुर्रीपालेम और ओबुलनायडुपालेम गांवों में कुल 177 घर बनाए जाएंगे। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 14 करोड़ रुपये है और इसे प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) 2.0 के तहत लागू किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक निर्माण कार्य लगभग छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

क्या है 3D कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक?

3D कंक्रीट प्रिंटिंग एक आधुनिक निर्माण तकनीक है, जिसमें कंप्यूटर नियंत्रित मशीन के जरिए विशेष कंक्रीट मिश्रण को परत-दर-परत प्रिंट करके घर की दीवारों और संरचना का निर्माण किया जाता है।

पारंपरिक निर्माण में ईंट, सीमेंट, सरिया और अलग-अलग चरणों में बड़ी संख्या में श्रमिकों की जरूरत होती है। वहीं 3D प्रिंटिंग तकनीक में डिजिटल डिजाइन के अनुसार मशीन निर्धारित स्थान पर कंक्रीट की परतें डालती जाती है।

कम समय और कम श्रम में निर्माण की उम्मीद

सरकार के अनुसार इस तकनीक से घरों के निर्माण में लगने वाला समय और श्रम दोनों कम हो सकते हैं। इसके अलावा निर्माण प्रक्रिया में सामग्री की बर्बादी कम करने और निर्माण की गुणवत्ता को अधिक एकसमान रखने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 3D कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक से समय, लागत और श्रम की बचत होगी। परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण आवास निर्माण में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं को परखना है।

PMAY-G 2.0 के तहत आंध्र प्रदेश को 3 लाख घर

इसी कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश के लिए 3 लाख ग्रामीण आवासों की पहली किस्त के रूप में 3,600 करोड़ रुपये की राशि से जुड़ी सहायता भी सौंपी। ये घर प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण 2.0 के तहत बनाए जाएंगे।

केंद्र के अनुसार आंध्र प्रदेश के लिए पहले 76 हजार घरों का प्रावधान था, लेकिन राज्य की अतिरिक्त मांग के बाद 3 लाख घरों को मंजूरी दी गई।

तकनीक से ग्रामीण आवास में बदलाव की उम्मीद

3D कंक्रीट प्रिंटिंग का इस्तेमाल दुनिया के कई हिस्सों में निर्माण क्षेत्र में किया जा रहा है। भारत में आंध्र प्रदेश की यह परियोजना ग्रामीण आवास के क्षेत्र में इस तकनीक के बड़े स्तर पर इस्तेमाल की संभावनाओं को परखने वाला महत्वपूर्ण पायलट प्रोजेक्ट है।

इस तकनीक के जरिए एक डिजिटल डिजाइन के आधार पर निर्माण किया जाता है। इससे डिजाइन में सटीकता बनाए रखने और निर्माण प्रक्रिया को अधिक स्वचालित बनाने में मदद मिलती है।

छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य

परियोजना के तहत बनाए जाने वाले 177 घरों को करीब छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। सरकार का कहना है कि इन घरों में आधुनिक निर्माण तकनीक के साथ मजबूती और टिकाऊपन पर भी ध्यान दिया जाएगा।

यदि पायलट परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किफायती और तेजी से आवास निर्माण के लिए किया जा सकता है।

देश के आवास क्षेत्र के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

भारत में बड़ी संख्या में लोगों को किफायती और टिकाऊ आवास उपलब्ध कराना ग्रामीण विकास की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में निर्माण तकनीक में बदलाव से कम समय में अधिक घर बनाने की संभावना पैदा हो सकती है।

आंध्र प्रदेश का यह पायलट प्रोजेक्ट यह देखने का अवसर भी देगा कि 3D कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक भारतीय ग्रामीण परिस्थितियों, स्थानीय जलवायु और आवास की जरूरतों के अनुरूप कितनी प्रभावी साबित होती है।

निष्कर्ष

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले से भारत में ग्रामीण आवास निर्माण के क्षेत्र में 3D तकनीक के इस्तेमाल की नई शुरुआत हुई है। बुर्रीपालेम और ओबुलनायडुपालेम में 177 घरों का निर्माण करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा और इसे छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। यह परियोजना भविष्य में देश में तेज, तकनीक आधारित और टिकाऊ आवास निर्माण के लिए एक मॉडल के रूप में काम कर सकती है।

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