कुमकुम मोहोद और सुजीत कलकल को मिलेगा पहला जसपाल राणा और राजा रणधीर सिंह पुरस्कार, एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन का सम्मान ???

एशियाई खेलों के सर्वश्रेष्ठ महिला और पुरुष खिलाड़ी के लिए शुरू हुए पुरस्कार...

नई दिल्ली: भारतीय तीरंदाज कुमकुम अनिल मोहोद और पहलवान सुजीत कलकल को भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के नए पुरस्कारों का पहला विजेता चुना गया है। कुमकुम को पहला जसपाल राणा पुरस्कार, जबकि सुजीत कलकल को पहला राजा रणधीर सिंह पुरस्कार दिया जाएगा। दोनों खिलाड़ियों को आइची-नागोया एशियाई खेल 2026 में शानदार प्रदर्शन के लिए यह सम्मान दिया जा रहा है।

भारतीय ओलंपिक संघ ने इन दोनों पुरस्कारों की शुरुआत एशियाई खेलों में भारत के सर्वश्रेष्ठ महिला और पुरुष खिलाड़ी को सम्मानित करने के लिए की है। इन पुरस्कारों का नाम भारतीय खेल जगत की दो दिग्गज हस्तियों जसपाल राणा और राजा रणधीर सिंह के नाम पर रखा गया है। दोनों का 2026 में निधन हुआ था।

आईओए आने वाले दिनों में एक समारोह आयोजित कर कुमकुम मोहोद और सुजीत कलकल को इन पुरस्कारों से सम्मानित करेगा।

कुमकुम मोहोद बनीं जसपाल राणा पुरस्कार की पहली विजेता

महज 17 साल की कुमकुम मोहोद ने अपने पहले ही एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने कुल तीन पदक जीते, जिनमें दो स्वर्ण पदक शामिल हैं।

कुमकुम ने अंकिता भकत और कीर्ति के साथ मिलकर महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने एशियाई खेलों में महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में दक्षिण कोरिया के लगातार सात स्वर्ण पदकों के सिलसिले को खत्म किया। दक्षिण कोरिया ने 1998 बैंकॉक एशियाई खेलों से लगातार इस स्पर्धा में स्वर्ण जीता था।

इसके बाद कुमकुम ने महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि एशियाई खेलों के इतिहास में पहली बार दक्षिण कोरिया की महिला तीरंदाज इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने में असफल रहीं।

कुमकुम के व्यक्तिगत स्वर्ण पदक ने भारत के लिए 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का कोटा स्थान भी सुनिश्चित किया।

सुजीत कलकल को पहला राजा रणधीर सिंह पुरस्कार

वहीं 23 वर्षीय पहलवान सुजीत कलकल को पुरुष वर्ग में पहला राजा रणधीर सिंह पुरस्कार दिया जाएगा। सुजीत ने आइची-नागोया एशियाई खेलों में पुरुषों की 65 किलोग्राम फ्रीस्टाइल कुश्ती में स्वर्ण पदक जीता था।

सुजीत का फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। वह मुकाबले में एक समय 2-9 से पीछे चल रहे थे और समय भी तेजी से खत्म हो रहा था। इसके बावजूद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए मुकाबला 10-9 से जीत लिया और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

फाइनल से पहले सुजीत ने सेमीफाइनल में जापान के मौजूदा ओलंपिक चैंपियन कोटारो कियोका को हराकर फाइनल में जगह बनाई थी।

65 किलो वर्ग में भारत की परंपरा जारी

सुजीत कलकल की जीत ने एशियाई खेलों में पुरुषों के 65 किलोग्राम वर्ग में भारत की मजबूत परंपरा को आगे बढ़ाया। उनसे पहले योगेश्वर दत्त ने 2014 और बजरंग पूनिया ने 2018 एशियाई खेलों में इसी भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था।

सुजीत की शानदार वापसी ने उन्हें भारतीय दल के प्रमुख प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। आईओए अध्यक्ष पीटी उषा ने भी उनके संघर्ष और दबाव में प्रदर्शन की सराहना की।

जसपाल राणा और राजा रणधीर सिंह के नाम पर क्यों रखे गए पुरस्कार?

जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के प्रमुख नामों में शामिल रहे और बाद में उन्होंने निशानेबाजी कोच के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर के कोच भी रहे।

वहीं राजा रणधीर सिंह भारतीय और एशियाई खेल प्रशासन के प्रमुख चेहरों में रहे। उन्होंने लंबे समय तक भारतीय ओलंपिक संघ के महासचिव के रूप में काम किया और बाद में ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया (OCA) के अध्यक्ष भी रहे।

इन दोनों के योगदान को याद रखने और एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के बेहतरीन प्रदर्शन को सम्मानित करने के लिए आईओए ने इन पुरस्कारों की शुरुआत की है।

भारत ने एशियाई खेलों में जीते 85 पदक

आइची-नागोया एशियाई खेल 2026 में भारत ने कुल 85 पदक जीते। इनमें 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक शामिल रहे और भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा।

कुमकुम मोहोद और सुजीत कलकल का प्रदर्शन भारतीय दल के लिए इन खेलों की प्रमुख उपलब्धियों में रहा। अब दोनों खिलाड़ी नए शुरू किए गए आईओए पुरस्कारों के पहले विजेता बनकर इतिहास में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं।

Back to top button