NCBI और IARC से जुड़े शोधों में बहुत गर्म पेय और एसोफैगल कैंसर के बीच संबंध सामने आया है। जानें कितनी गर्म चाय से सावधानी जरूरी है???
बहुत गर्म चाय-कॉफी बढ़ा सकती है खाने की नली के कैंसर का खतरा? रिसर्च में सामने आईं अहम बातें...
Cancer Cause: भारत समेत दुनिया के कई देशों में सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी से होती है। कुछ लोग इसे इतना गर्म पीना पसंद करते हैं कि कप से निकलती भाप के बीच ही चाय-कॉफी पीना शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या बहुत गर्म पेय पीने की यह आदत सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है? वैज्ञानिक शोधों में लंबे समय से बहुत गर्म पेय और खाने की नली यानी एसोफैगस के कैंसर के बीच संभावित संबंध की जांच की जाती रही है।
नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के PubMed डेटाबेस में प्रकाशित अध्ययनों में भी गर्म चाय पीने के तापमान और एसोफैगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (ESCC) के जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि चाय या कॉफी पीने वाला हर व्यक्ति कैंसर का शिकार हो जाएगा। वैज्ञानिकों का मुख्य फोकस पेय के तापमान पर है।
कितनी गर्म चाय-कॉफी को माना जाता है बहुत गर्म?
इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने 65 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा तापमान वाले बहुत गर्म पेय को मनुष्यों के लिए “probably carcinogenic” यानी कैंसर पैदा करने की संभावना वाली श्रेणी Group 2A में रखा है। यह वर्गीकरण खास तौर पर खाने की नली के कैंसर से जुड़े उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित है।
यहां यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि 65°C की चाय पीते ही कैंसर हो जाएगा। IARC के मुताबिक उपलब्ध आंकड़े यह बताते हैं कि बहुत गर्म पेय और एसोफैगल कैंसर के बीच संभावित संबंध है, लेकिन इससे यह निर्धारित नहीं होता कि कितनी मात्रा या कितने समय तक ऐसा पेय पीने से किसी व्यक्ति को कैंसर होगा।
NCBI में प्रकाशित रिसर्च में क्या मिला?
एक prospective study में शोधकर्ताओं ने ईरान के Golestan Cohort Study के 50,045 लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। प्रतिभागियों की चाय पीने की आदत और चाय के तापमान का आकलन किया गया तथा उन्हें औसतन करीब 10 वर्षों तक फॉलो किया गया।
इस दौरान 317 नए एसोफैगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के मामले सामने आए। शोध में पाया गया कि 60°C या उससे ज्यादा तापमान पर चाय पीने वालों में 60°C से कम तापमान वाली चाय पीने वालों की तुलना में जोखिम अधिक था। वहीं बहुत गर्म चाय पीने की स्वयं बताई गई आदत भी अधिक जोखिम से जुड़ी थी।
एक अन्य NCBI/PubMed अध्ययन में 65°C से अधिक गर्म चाय पीने को एसोफैगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया। उस अध्ययन में बहुत गर्म चाय पीने वालों में गैर-चाय पीने वालों की तुलना में जोखिम का अनुपात अधिक पाया गया।
आखिर गर्म पेय से कैंसर का जोखिम क्यों बढ़ सकता है?
वैज्ञानिकों के अनुसार एक संभावित वजह बार-बार होने वाली thermal injury यानी गर्मी से ऊतकों को होने वाली चोट हो सकती है। बहुत गर्म तरल पदार्थ मुंह, गले और खाने की नली की अंदरूनी परत को बार-बार नुकसान पहुंचा सकते हैं।
लगातार होने वाली ऐसी गर्मी से कोशिकाओं में चोट और उनके दोबारा बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसी कारण वैज्ञानिकों ने बहुत गर्म पेय को एसोफैगल कैंसर के संभावित जोखिम कारकों में शामिल करके अध्ययन किया है। हालांकि शरीर में कैंसर विकसित होने की प्रक्रिया जटिल होती है और केवल एक कारण से किसी व्यक्ति में कैंसर होना तय नहीं होता।
सिर्फ चाय ही नहीं, कॉफी और दूसरे गर्म पेय भी चर्चा में
यह जोखिम केवल चाय तक सीमित नहीं माना जाता। वैज्ञानिक साहित्य में बहुत गर्म चाय, कॉफी और अन्य पेय के तापमान को भी अध्ययन किया गया है।
2022 में IARC द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में Malawi और Tanzania में 849 एसोफैगल कैंसर मामलों तथा 906 नियंत्रण प्रतिभागियों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। शोध में बहुत गर्म भोजन और पेय पदार्थों के सेवन से जुड़े कई thermal exposure factors को एसोफैगल स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के जोखिम से जोड़ा गया।
क्या सामान्य गर्म चाय-कॉफी भी खतरनाक है?
यहां सबसे महत्वपूर्ण अंतर “गर्म” और “बहुत गर्म” के बीच है।
IARC का वर्गीकरण खास तौर पर 65°C से ऊपर के very hot beverages के संबंध में है। उपलब्ध शोधों में कम तापमान वाले गर्म पेय के लिए प्रमाण उतने स्पष्ट नहीं हैं। 2025 के UK Biobank विश्लेषण में भी बताया गया कि 65°C से कम तापमान वाले गर्म पेय और बहुत गर्म पेय के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।
इसलिए सामान्य तौर पर चाय या कॉफी पीना अपने-आप कैंसर का कारण नहीं माना जाना चाहिए। चिंता खास तौर पर उस आदत को लेकर है जिसमें व्यक्ति बहुत ज्यादा गर्म पेय को लगातार और लंबे समय तक पीता है, खासकर तब जब पेय मुंह या गले को जलाने जैसा महसूस हो।
चाय पीने का सुरक्षित तरीका क्या हो सकता है?
चाय या कॉफी बनते ही तुरंत पीने के बजाय कुछ समय इंतजार करना एक व्यावहारिक सावधानी हो सकती है। यदि पेय इतना गर्म है कि मुंह या जीभ जलने लगे, तो उसे थोड़ा ठंडा होने देना बेहतर है।
कुछ आसान आदतें अपनाई जा सकती हैं—
- चाय या कॉफी को बहुत ज्यादा गर्म अवस्था में न पिएं।
- पेय को कप में डालने के बाद कुछ मिनट ठंडा होने दें।
- मुंह या गले में जलन महसूस हो तो तुरंत पीना रोक दें।
- रोजाना बहुत गर्म पेय पीने की आदत है तो तापमान कम करने की कोशिश करें।
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब जैसे अन्य ज्ञात कैंसर जोखिम कारकों से बचना भी महत्वपूर्ण है। IARC के अनुसार कई देशों में तंबाकू और शराब एसोफैगल कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।
क्या गर्म चाय छोड़ने की जरूरत है?
नहीं। उपलब्ध शोधों का संदेश यह नहीं है कि लोगों को चाय या कॉफी पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए। मुख्य बात तापमान को लेकर सावधानी है।
IARC ने भी स्पष्ट किया है कि उसका वर्गीकरण बहुत गर्म पेय और खाने की नली के कैंसर के बीच संभावित संबंध को दर्शाता है। यह यह नहीं बताता कि किसी व्यक्ति को कितनी मात्रा में ऐसा पेय पीने से कैंसर हो जाएगा।
इसलिए चाय-कॉफी का आनंद लिया जा सकता है, लेकिन उसे अत्यधिक गर्म अवस्था में पीने से बचना समझदारी हो सकती है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
खाने की नली से जुड़ी किसी गंभीर समस्या के लक्षणों में लंबे समय तक निगलने में परेशानी, खाना निगलते समय दर्द, लगातार सीने में असहजता, बिना वजह वजन कम होना या लंबे समय तक बनी रहने वाली अन्य समस्या शामिल हो सकती है।
हालांकि ऐसे लक्षण कई अन्य कारणों से भी हो सकते हैं। इसलिए यदि कोई लक्षण लगातार बना रहता है या बढ़ रहा है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। केवल चाय या कॉफी पीने की आदत के आधार पर कैंसर का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
निष्कर्ष
वैज्ञानिक शोधों में बहुत गर्म पेय और खाने की नली के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। खासकर 65°C से अधिक तापमान वाले पेय को लेकर IARC ने उन्हें Group 2A यानी “probably carcinogenic to humans” की श्रेणी में रखा है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सामान्य तापमान की चाय या कॉफी कैंसर पैदा करती है। सबसे व्यावहारिक सावधानी यही है कि चाय-कॉफी को इतना गर्म न पिएं कि मुंह या गले में जलन होने लगे। पेय को कुछ देर ठंडा करके पीना बेहतर विकल्प हो सकता है।





