Indian Ports Act 2025 :- भारत ने Deendayal, Jawaharlal Nehru, Paradip और Mundra को Mega Port घोषित किया???
भारत ने Deendayal, JNPA, Paradip और Mundra को Mega Port घोषित किया....
Indian Ports Act 2025 के तहत केंद्र सरकार ने देश के चार बंदरगाहों को पहली बार ‘Mega Port’ का दर्जा दिया, इनमें तीन प्रमुख बंदरगाह और एक गैर-प्रमुख बंदरगाह शामिल है।
भारत सरकार ने देश के बंदरगाह क्षेत्र में एक नई श्रेणी की शुरुआत करते हुए Deendayal Port (Kandla), Jawaharlal Nehru Port (Nhava Sheva), Paradip Port और Mundra Port को देश के पहले Mega Ports के रूप में अधिसूचित किया है। यह घोषणा Indian Ports Act, 2025 के तहत की गई है। बंदरगाहों को Mega Port का दर्जा देने वाली अधिसूचना 25 सितंबर 2026 को जारी की गई।
Indian Ports Act 2025 के तहत मिली नई पहचान
बंदरगाहों को Mega Port घोषित करने की व्यवस्था Indian Ports Act, 2025 की धारा 73 के तहत की गई है। केंद्र सरकार ने पहले जुलाई 2026 में Mega Port के लिए आवश्यक मानदंड अधिसूचित किए थे। इसके बाद निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले चार बंदरगाहों को यह दर्जा दिया गया।
Mega Port की यह श्रेणी मुख्य रूप से बंदरगाहों के कार्गो हैंडलिंग और संचालन की क्षमता पर आधारित है। Bulk cargo ports के लिए सालाना कम से कम 150 मिलियन टन (MMT) और container ports के लिए 7.5 मिलियन TEU का मानदंड निर्धारित किया गया है।
कौन-कौन से बंदरगाह बने Mega Port?
केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार चार बंदरगाहों को यह दर्जा मिला है—
- Deendayal Port – Kandla, Gujarat
- Jawaharlal Nehru Port – Nhava Sheva, Maharashtra
- Paradip Port – Odisha
- Mundra Port – Gujarat
इनमें Deendayal, Jawaharlal Nehru और Paradip पहले से भारत के प्रमुख बंदरगाहों (Major Ports) में शामिल हैं। वहीं Mundra Port को मौजूदा कानूनी वर्गीकरण के तहत Major Port के बजाय अन्य बंदरगाह (Port other than a major port) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
Paradip बना पूर्वी तट का पहला Mega Port
चारों बंदरगाहों में Paradip Port की स्थिति खास है। यह भारत के पूर्वी तट पर Mega Port का दर्जा पाने वाला पहला और एकमात्र बंदरगाह है। ओडिशा स्थित Paradip Port पूर्वी और मध्य भारत के बड़े हिस्से के लिए समुद्री व्यापार का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है।
Paradip Port ने वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 150.41 मिलियन मीट्रिक टन कार्गो संभाला था, जो Mega Port के bulk cargo मानदंड के अनुरूप है।
Mega Port बनने का क्या मतलब है?
Mega Port का दर्जा मिलने से इन बंदरगाहों की मौजूदा कानूनी श्रेणी नहीं बदलती। यानी Major Port और non-major port का मौजूदा वर्गीकरण अपने स्थान पर बना रहेगा। नई Mega Port श्रेणी मुख्य रूप से उच्च कार्गो क्षमता वाले बंदरगाहों की पहचान के लिए बनाई गई है।
इससे देश के बड़े maritime gateways की क्षमता और रणनीतिक महत्व को अलग से चिन्हित किया जा सकेगा। इन बंदरगाहों के जरिए देश के घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मात्रा में माल का परिवहन होता है।
पांच साल के लिए रहेगा Mega Port का दर्जा
Mega Port का दर्जा पांच साल के लिए प्रभावी रहेगा। निर्धारित अवधि के बाद संबंधित बंदरगाह की पात्रता की समीक्षा की जाएगी। रिपोर्टों के अनुसार, एक बार Mega Port के रूप में अधिसूचित होने के बाद यदि बाद में उसका cargo throughput कुछ समय के लिए निर्धारित सीमा से नीचे भी जाता है, तो तत्काल दर्जा समाप्त नहीं होता।
भारत के समुद्री व्यापार के लिए महत्व
भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार बड़े पैमाने पर समुद्री मार्गों से संचालित होता है। ऐसे में उच्च क्षमता वाले बंदरगाह देश की supply chain, logistics और export-import infrastructure के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Deendayal Port पश्चिमी और उत्तरी भारत के लिए महत्वपूर्ण समुद्री gateway है, जबकि Jawaharlal Nehru Port मुंबई क्षेत्र और hinterland के container trade में अहम भूमिका निभाता है। Paradip पूर्वी और मध्य भारत के bulk cargo trade के लिए महत्वपूर्ण है और Mundra पश्चिमी तट का एक प्रमुख निजी बंदरगाह है।
निष्कर्ष
Indian Ports Act, 2025 के तहत Deendayal, Jawaharlal Nehru, Paradip और Mundra को देश के पहले Mega Ports के रूप में अधिसूचित किया जाना भारत के maritime infrastructure में नई श्रेणी की शुरुआत है। चारों बंदरगाहों ने निर्धारित cargo-handling मानदंडों को पूरा किया है। इनमें Paradip पूर्वी तट का पहला Mega Port है, जबकि Mundra इस सूची में शामिल एकमात्र ऐसा बंदरगाह है जो Major Port की मौजूदा श्रेणी में नहीं आता।






