ISRO Project NETRA: असम के चंद्रपुर में एडवांस्ड रडार रिसर्च फैसिलिटी की आधारशिला, अंतरिक्ष में वस्तुओं की निगरानी होगी मजबूत???
ISRO Advanced Radar Facility: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों और अन्य वस्तुओं की निगरानी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है...
असम के चंद्रपुर में ISRO के ISTRAC Advanced Radar Research Facility की आधारशिला रखी गई है। यह सुविधा Project NETRA के तहत विकसित की जा रही है और भारत की Space Situational Awareness क्षमता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
असम के चंद्रपुर में शुरू हुआ महत्वपूर्ण अंतरिक्ष प्रोजेक्ट
असम के चंद्रपुर में 21 सितंबर 2026 को ISRO के ISTRAC Advanced Radar Research Facility (IARRF) की आधारशिला रखी गई। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने भूमि पूजन के साथ इस सुविधा की आधारशिला रखी। कार्यक्रम में ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
यह सुविधा ISRO के Telemetry, Tracking and Command Network (ISTRAC) के तहत विकसित की जा रही है। इसका संबंध ISRO के Project NETRA यानी Network for Space Object Tracking and Analysis से है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की निगरानी और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की भारत की क्षमता को मजबूत करना है।
Project NETRA क्या है?
Project NETRA भारत की Space Situational Awareness यानी अंतरिक्ष परिस्थिति जागरूकता से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल है। इसके जरिए पृथ्वी की कक्षा में मौजूद उपग्रहों, रॉकेट बॉडी और अन्य अंतरिक्ष वस्तुओं को ट्रैक करने की क्षमता विकसित की जा रही है।
जैसे-जैसे अंतरिक्ष में उपग्रहों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे कक्षीय मलबे और दूसरी अंतरिक्ष वस्तुओं की निगरानी भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। किसी उपग्रह की कक्षा के आसपास मौजूद अन्य वस्तुओं की जानकारी होने से संभावित टक्कर के जोखिम का आकलन करने और अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा में मदद मिल सकती है।
एडवांस्ड रडार और ऑप्टिकल टेलीस्कोप से होगी निगरानी
चंद्रपुर में बनने वाली सुविधा में एडवांस्ड रडार सिस्टम और ऑप्टिकल टेलीस्कोप लगाए जाने की योजना है। इनके जरिए अंतरिक्ष में मौजूद विभिन्न वस्तुओं की स्थिति और गतिविधियों को ट्रैक करने में मदद मिलेगी।
रडार आधारित सिस्टम का एक फायदा यह है कि यह ऐसी परिस्थितियों में भी वस्तुओं की निगरानी कर सकता है, जब ऑप्टिकल ऑब्जर्वेशन सीमित हो। इससे भारत के मौजूदा ग्राउंड-बेस्ड स्पेस सर्विलांस नेटवर्क को अतिरिक्त क्षमता मिलने की उम्मीद है।
67 एकड़ की साइट पर विकसित होगा प्रोजेक्ट
ISRO की 2025-26 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार चंद्रपुर, असम में रडार के लिए 67 एकड़ की साइट की पहचान की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक जमीन के हस्तांतरण का मेमोरेंडम नवंबर 2023 में पूरा हुआ था और भूमि का अंतिम पंजीकरण 7 नवंबर 2025 को पूरा किया गया।
असम सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जमीन पहले चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन से जुड़ी थी। अलग-अलग रिपोर्टों में भूमि का क्षेत्रफल लगभग 67 से 70 एकड़ बताया गया है।
क्लाउड रिसर्च के लिए पहला रडार फरवरी तक
इस सुविधा का महत्व केवल अंतरिक्ष निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि यहां क्लाउड रिसर्च के लिए पहला रडार फरवरी 2027 के अंत तक स्थापित किए जाने की उम्मीद है। इसके जरिए बादलों, वायुमंडलीय परिस्थितियों और मौसम संबंधी घटनाओं के अध्ययन में भी मदद मिल सकती है।
ISRO के अनुसार, आगे चलकर दो अन्य महत्वपूर्ण रडार भी स्थापित किए जाने की योजना है। इससे क्षेत्र में अंतरिक्ष और वायुमंडलीय अनुसंधान की क्षमता बढ़ सकती है।
पूर्वोत्तर भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह केंद्र?
चंद्रपुर में यह सुविधा स्थापित होने से असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत में अंतरिक्ष विज्ञान एवं अनुसंधान के लिए नया आधार तैयार होने की उम्मीद है। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, कौशल विकास और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
यह सुविधा भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से पूर्वोत्तर क्षेत्र की भागीदारी को भी बढ़ा सकती है। विशेष रूप से विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और छात्रों के लिए स्पेस साइंस और रडार तकनीक से जुड़े अनुसंधान के अवसर विकसित होने की संभावना है।
भारत की अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा में मदद
आज अंतरिक्ष में बड़ी संख्या में उपग्रह काम कर रहे हैं। संचार, मौसम, नेविगेशन, पृथ्वी अवलोकन और अन्य सेवाओं के लिए इन उपग्रहों की भूमिका महत्वपूर्ण है। ऐसे में अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की लगातार निगरानी करना आवश्यक हो जाता है।
चंद्रपुर की सुविधा से प्राप्त जानकारी भारत को अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की स्थिति और गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करेगी। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की सुरक्षा और Space Situational Awareness को मजबूत करना है।
अंतरिक्ष विज्ञान के साथ मौसम अनुसंधान को भी बढ़ावा
चंद्रपुर सुविधा की एक खास बात यह है कि यहां अंतरिक्ष निगरानी के साथ-साथ वायुमंडलीय और मौसम संबंधी अनुसंधान पर भी काम किया जा सकता है। क्लाउड रडार के जरिए बादलों की संरचना और उनकी गतिविधियों से संबंधित वैज्ञानिक आंकड़े प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।
असम और पूर्वोत्तर भारत में बारिश, बाढ़ और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं को देखते हुए इस तरह के वैज्ञानिक अध्ययन क्षेत्रीय मौसम एवं आपदा प्रबंधन से जुड़े अनुसंधान के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
भारत की Space Situational Awareness क्षमता को मिलेगी मजबूती
Project NETRA के तहत चंद्रपुर की यह सुविधा भारत के बढ़ते Space Situational Awareness नेटवर्क का हिस्सा बनेगी। ISRO पहले से ही अंतरिक्ष में मौजूद वस्तुओं की निगरानी और ट्रैकिंग से संबंधित क्षमता विकसित कर रहा है।
इसके तहत रडार, ऑप्टिकल टेलीस्कोप और अन्य ग्राउंड-बेस्ड सिस्टम के जरिए अंतरिक्ष वस्तुओं के बारे में जानकारी जुटाई जाती है। चंद्रपुर की सुविधा इस नेटवर्क में एक और महत्वपूर्ण केंद्र जोड़ सकती है।
निष्कर्ष
असम के चंद्रपुर में ISRO ISTRAC Advanced Radar Research Facility की आधारशिला भारत की अंतरिक्ष निगरानी क्षमता के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। Project NETRA के तहत विकसित होने वाली यह सुविधा रडार और ऑप्टिकल टेलीस्कोप के जरिए अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों और अन्य वस्तुओं की निगरानी में मदद करेगी। इसके साथ ही क्लाउड और वायुमंडलीय अनुसंधान के लिए भी यहां रडार स्थापित किया जाएगा। इससे असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत में अंतरिक्ष विज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी कौशल के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।






