भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत लखनऊ में शुरू हुआ 18वां BRICS अकादमिक फोरम, वैश्विक चुनौतियों पर होगा मंथन ???

भारत की BRICS अध्यक्षता में लखनऊ में शुरू हुआ 18वां BRICS अकादमिक फोरम...

लखनऊ में 18वें ब्रिक्स एकेडमिक फोरम का समापन, वैश्विक चुनौतियों और भविष्य की नीतियों पर मंथन हुआ

लखनऊ बना BRICS देशों के बुद्धिजीवियों और नीति विशेषज्ञों का वैश्विक मंच

भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 18वें BRICS Academic Forum का शुभारंभ हुआ। लखनऊ विश्वविद्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच पर BRICS सदस्य देशों के शिक्षाविद, शोधकर्ता, थिंक टैंक विशेषज्ञ और नीति-निर्माता वैश्विक विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। फोरम का आयोजन Observer Research Foundation (ORF) ने Research and Information System for Developing Countries (RIS) और लखनऊ विश्वविद्यालय के सहयोग से किया है।

इस फोरम की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है। इसके तहत वैश्विक अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन, नई तकनीक, नवाचार, सतत विकास, वैज्ञानिक सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत बनाने जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।

भारत की अध्यक्षता में ‘Humanity First’ पर जोर

फोरम के उद्घाटन सत्र में भारत के BRICS शेरपा और विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने कहा कि भारत की BRICS अध्यक्षता का दृष्टिकोण जन-केंद्रित और “Humanity First” के सिद्धांत पर आधारित है। उन्होंने बताया कि भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान देश के विभिन्न शहरों में 400 से अधिक BRICS बैठकें आयोजित की हैं, जिनमें बड़ी संख्या में बैठकों से ठोस परिणाम सामने आए हैं।

उन्होंने कहा कि BRICS अब केवल संवाद का मंच नहीं है, बल्कि विचारों को व्यावहारिक नीतियों और ठोस परिणामों में बदलने वाला एक महत्वपूर्ण वैश्विक सहयोग तंत्र बनता जा रहा है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सततता को प्राथमिकता दी है।

आर्थिक मजबूती से लेकर जलवायु परिवर्तन तक होगी चर्चा

18वें BRICS अकादमिक फोरम में दुनिया के सामने मौजूद कई गंभीर चुनौतियों पर विचार किया जा रहा है। इनमें आर्थिक स्थिरता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी बदलाव और वैश्विक संस्थाओं में सुधार प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों के बीच नवीकरणीय ऊर्जा, MSME क्षेत्र, विज्ञान, उभरती प्रौद्योगिकियां, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार, मानव विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। फोरम का उद्देश्य BRICS देशों के बीच साझा चुनौतियों के लिए व्यावहारिक और नीति-आधारित समाधान तैयार करना है।

ज्ञान और नीति निर्माण को जोड़ने में विश्वविद्यालयों की बड़ी भूमिका

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ज्ञान, शोध और सार्वजनिक नीति के बीच सेतु का काम करते हैं। उन्होंने BRICS अकादमिक फोरम को सदस्य देशों के बीच अनुभव साझा करने और साझा भविष्य के लिए नए विचार विकसित करने का महत्वपूर्ण मंच बताया।

फोरम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सरकारी स्तर पर नहीं, बल्कि शोध संस्थानों, विश्वविद्यालयों, थिंक टैंकों और नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी से ही संभव है।

नवाचार और तकनीक से भविष्य की तैयारी

ORF के अध्यक्ष समीर सरन ने BRICS के भविष्य के एजेंडे में तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की गवर्नेंस, हरित परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा और पारिस्थितिकी तंत्र के साथ सतत सह-अस्तित्व को महत्वपूर्ण बताया।

वहीं विशेषज्ञों ने कहा कि BRICS देशों को केवल संकट आने के बाद प्रतिक्रिया देने की बजाय भविष्य की चुनौतियों के लिए पहले से तैयार रहना होगा। इसके लिए शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, युवाओं और महिलाओं पर निवेश को आवश्यक बताया गया।

BRICS देशों के बीच वैज्ञानिक और अकादमिक सहयोग पर जोर

फोरम में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैज्ञानिक और अकादमिक साझेदारी बढ़ाने की जरूरत पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में सदस्य देशों के बीच ज्ञान, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

संयुक्त शोध, अकादमिक नेटवर्क, फेलोशिप, वैज्ञानिक आदान-प्रदान और युवाओं के बीच सहयोग को BRICS की भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया।

BRICS Think Tanks Council की सिफारिशें होंगी अहम

फोरम के दौरान BRICS Think Tanks Council की ओर से तैयार की गई सिफारिशें भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों को सौंपी जाएंगी। इन सिफारिशों में आर्थिक और जलवायु लचीलापन बढ़ाने, तकनीकी सहयोग मजबूत करने, सतत विकास को आगे बढ़ाने और अधिक समावेशी बहुपक्षीय व्यवस्था विकसित करने जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी जा रही है।

फोरम में “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” विषय पर BRICS कॉम्पेंडियम का भी विमोचन किया गया, जो सदस्य देशों के बीच सहयोग और भविष्य की नीतिगत दिशा पर महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत करता है।

लखनऊ को मिला वैश्विक कूटनीतिक मंच

18वें BRICS Academic Forum की मेजबानी लखनऊ के लिए भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत देश के अलग-अलग शहरों में अंतरराष्ट्रीय बैठकें आयोजित कर वैश्विक कूटनीति को बड़े महानगरों तक सीमित न रखने का प्रयास किया जा रहा है।

लखनऊ की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक पहचान इस आयोजन को विशेष महत्व देती है। यह फोरम उत्तर प्रदेश की राजधानी को वैश्विक नीति, शिक्षा और शोध से जुड़े महत्वपूर्ण विमर्शों के केंद्र के रूप में भी स्थापित कर रहा है।

‘साथ मिलकर विकास’ का संदेश

BRICS अकादमिक फोरम का मुख्य संदेश यही है कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में कोई भी देश अकेले सभी वैश्विक चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकता। आर्थिक संकट, जलवायु परिवर्तन, तकनीकी असमानता और विकास से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिए सहयोग और साझा प्रयास जरूरी हैं।

भारत की अध्यक्षता के तहत आयोजित यह फोरम BRICS देशों के बीच ज्ञान और नीति के बेहतर समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लखनऊ से निकलने वाले विचार और सिफारिशें आने वाले समय में BRICS के व्यापक एजेंडे और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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