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कैंसर के इलाज में जगी नई उम्मीद, इम्यूनोथेरेपी दवा ने दिखाया कमाल

कैंसर आज दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। परंपरागत उपचार जैसे कीमोथेरेपी और रेडिएशन जहां कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाते हैं, वहीं वे अक्सर शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा देते हैं। इसी बीच, एक नई चिकित्सा पद्धति- इम्यूनोथेरेपी, वैज्ञानिकों और मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है।

इम्यूनोथेरेपी क्या है?
इम्यूनोथेरेपी ऐसा इलाज है जिसमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर के खिलाफ मजबूत किया जाता है। यह सीधे कैंसर कोशिकाओं पर हमला करती है और स्वस्थ कोशिकाओं को अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचाती है। हाल ही में इसके उन्नत रूप ने शुरुआती परीक्षणों में चौंकाने वाले परिणाम दिखाए हैं।

नई दवा से मिले उत्साहजनक नतीजे
वैज्ञानिकों ने सीडी 40 एगोनिस्ट एंटीबॉडीज नामक दवाओं का एक नया संस्करण विकसित किया है। पहले के परीक्षणों में ये दवाएं कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में तो असरदार रहीं, लेकिन इनके खतरनाक दुष्प्रभाव भी सामने आए, जैसे सूजन, प्लेटलेट्स की कमी और लिवर पर बुरा असर।

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए, 2018 में अमेरिका की रॉकफेलर यूनिवर्सिटी की एक टीम ने इसका उन्नत रूप विकसित किया। नई दवा, जिसे 2141-V11 नाम दिया गया, ने पहले चरण के क्लिनिकल परीक्षणों में बेहद सकारात्मक परिणाम दिए।

मरीजों में दिखा असर
परीक्षण में शामिल 12 मरीजों में से 6 के ट्यूमर छोटे हो गए और इनमें से 2 मरीजों में ट्यूमर पूरी तरह खत्म हो गया। सबसे खास बात यह रही कि दवा का असर केवल इंजेक्शन वाली जगह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों के ट्यूमर भी सिकुड़ने लगे या प्रतिरक्षा कोशिकाओं द्वारा नष्ट कर दिए गए।

यह असर क्यों खास है?
आमतौर पर दवा का असर केवल उसी हिस्से तक सीमित रहता है जहां उसे दिया जाता है। लेकिन 2141-V11 ने पूरे शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया। यही कारण है कि विशेषज्ञों ने इसे ‘अप्रत्याशित नतीजे’ बताया है।

कैसे काम करती है यह दवा?
सीडी 40 एक खास रिसेप्टर है, जो इम्यून कोशिकाओं की सतह पर पाया जाता है। जब यह सक्रिय होता है, तो यह पूरी प्रतिरक्षा प्रणाली को सतर्क कर देता है और ट्यूमर के खिलाफ लड़ाई शुरू हो जाती है। नई दवा को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह सीडी 40 रिसेप्टर से मजबूती से जुड़ सके और कैंसर के खिलाफ 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली प्रतिक्रिया पैदा कर सके।

राहत की बात- नहीं दिखे गंभीर दुष्प्रभाव
इस दवा की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि जिन मरीजों पर इसका परीक्षण किया गया, उन्हें पहले की दवाओं जैसे गंभीर दुष्प्रभाव नहीं झेलने पड़े। मेलेनोमा, स्तन कैंसर और किडनी कैंसर जैसे गंभीर मामलों में भी इसका असर साफ तौर पर देखा गया।

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