‘भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती चाहिए, खाड़ी देशों की नौकरी नहीं’, नेपाल में फिर उबाल, Ex गोरखाओं ने किया प्रदर्शन ???
Nepal Gurkha Protest: अग्निवीर भर्ती की मांग को लेकर पूर्व गोरखाओं का प्रदर्शन .....
Nepal Gurkha Protest: पूर्व गोरखा सैनिकों और नेपाली युवाओं ने पोखरा में किया प्रदर्शन, अग्निपथ के तहत भारतीय सेना में भर्ती फिर शुरू करने की मांग
Nepal Gurkha Protest: भारत और नेपाल के बीच गोरखा सैनिकों की भर्ती का रिश्ता दो सदियों से भी ज्यादा पुराना है। यही वजह है कि भारतीय सेना में नेपाली युवाओं की भर्ती रुकने का मुद्दा एक बार फिर नेपाल में जोर पकड़ रहा है। नेपाल के पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों, उनके परिवारों और भारतीय सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं ने प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि नेपाली युवाओं को भारत की अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर के रूप में भारतीय सेना में भर्ती होने का मौका दिया जाए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर भारतीय सेना में भर्ती का रास्ता बंद रहता है तो नेपाल के युवाओं के सामने विदेश, खासकर खाड़ी देशों में रोजगार तलाशने का विकल्प बचता है। उनका तर्क है कि भारतीय सेना में अग्निवीर के रूप में सेवा करना उनके लिए ज्यादा सम्मानजनक और आकर्षक अवसर है।
पोखरा में क्यों हुआ प्रदर्शन?
यह प्रदर्शन 12 अगस्त 2026 को पोखरा में आयोजित किया गया था। इसका आयोजन Indian Ex-Servicemen Gorkha Brigade Nepal Pokhara की ओर से किया गया। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन कार्यालय तक मार्च किया और संघीय सरकार के नाम दो सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में मुख्य रूप से दो मांगें रखी गईं—
- नेपाली युवाओं की भारतीय सेना में भर्ती प्रक्रिया तत्काल दोबारा शुरू की जाए।
- पूर्व सैनिक संगठनों के उन नामों का नवीनीकरण किया जाए, जिनमें ‘सैनिक’ शब्द का इस्तेमाल होता है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी भी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है।
‘अग्निवीर की नौकरी चाहिए, खाड़ी देशों में नहीं जाना’
प्रदर्शन का सबसे महत्वपूर्ण संदेश रोजगार से जुड़ा रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नेपाल में रोजगार के अवसर सीमित हैं और बड़ी संख्या में युवा विदेश जाकर नौकरी करने के लिए मजबूर होते हैं।
ऐसे में उनका कहना है कि नेपाली युवाओं को भारतीय सेना में अग्निवीर बनने का अवसर मिलना चाहिए, बजाय इसके कि वे रोजगार के लिए खाड़ी देशों का रुख करें। यही मांग प्रदर्शन में उठाई गई।
पूर्व गोरखा सैनिकों के लिए यह सिर्फ रोजगार का मुद्दा नहीं है। उनके मुताबिक भारतीय सेना में गोरखा भर्ती दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और सामाजिक रिश्ते का हिस्सा रही है।
2020 से रुकी है नेपाली युवाओं की भर्ती
भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती 2019 के बाद से बाधित है। शुरुआत में कोविड-19 महामारी के कारण भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। इसके बाद 2022 में भारत द्वारा अग्निपथ योजना लागू किए जाने के बाद नेपाल ने इस नई व्यवस्था के तहत भर्ती को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी।
नेपाल की आपत्ति मुख्य रूप से इस बात को लेकर रही कि चार साल की सेवा वाली अग्निपथ व्यवस्था गोरखा सैनिकों से संबंधित 1947 के भारत-ब्रिटेन-नेपाल त्रिपक्षीय समझौते की पुरानी व्यवस्था से कैसे मेल खाएगी।
यही वजह है कि अग्निपथ योजना लागू होने के बाद से नेपाल की तरफ से इस मुद्दे पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
क्या है अग्निपथ योजना?
भारत सरकार ने 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसके तहत सशस्त्र बलों में सैनिक स्तर पर युवाओं की भर्ती चार साल की अवधि के लिए की जाती है। इन युवाओं को अग्निवीर कहा जाता है।
चार साल की सेवा पूरी होने के बाद सभी अग्निवीरों को स्थायी सेवा नहीं मिलती। योजना के तहत अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को प्रदर्शन और सेना की जरूरतों के आधार पर नियमित कैडर में बनाए रखने का प्रावधान है, जबकि बाकी को सेवा से मुक्त किया जाता है।
यही चार साल की सेवा और उसके बाद की व्यवस्था नेपाल की प्रमुख चिंताओं में शामिल रही है।
गोरखा भर्ती का इतिहास कितना पुराना है?
भारतीय सेना में गोरखा सैनिकों की मौजूदगी का इतिहास 1815 तक जाता है। एंग्लो-नेपाल युद्ध के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने गोरखा सैनिकों को भर्ती करना शुरू किया था। बाद में ब्रिटिश भारतीय सेना में गोरखा रेजिमेंट्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
भारत की आजादी के बाद भी यह परंपरा जारी रही। 1947 में भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच त्रिपक्षीय समझौते के बाद गोरखा रेजिमेंटों का बंटवारा हुआ और छह गोरखा रेजिमेंट भारतीय सेना का हिस्सा बनीं।
इस तरह नेपाली नागरिकों का भारतीय सेना में शामिल होना भारत-नेपाल संबंधों की एक विशिष्ट परंपरा बन गया।
1947 का त्रिपक्षीय समझौता क्यों महत्वपूर्ण है?
1947 का समझौता भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच गोरखा सैनिकों की भर्ती और सेवा से जुड़े प्रावधानों का आधार है।
पुरानी व्यवस्था में गोरखा सैनिकों की सेवा, वेतन, पेंशन और अन्य सुविधाओं को लेकर विशेष प्रावधान थे। इसी कारण नेपाल में यह सवाल उठता रहा है कि अग्निपथ की चार वर्षीय सेवा व्यवस्था को इस ऐतिहासिक समझौते के संदर्भ में कैसे लागू किया जाएगा।
नेपाल की ओर से इसी मुद्दे को लेकर अग्निपथ के तहत गोरखा भर्ती पर रोक जारी रही।
पूर्व सैनिक क्यों हैं इतने चिंतित?
पूर्व गोरखा सैनिकों का कहना है कि भर्ती रुकने का असर सिर्फ वर्तमान युवाओं पर नहीं बल्कि गोरखा सैन्य परंपरा पर भी पड़ रहा है।
पीढ़ियों से नेपाली परिवारों के युवा भारतीय सेना में सेवा करते आए हैं। इस परंपरा से जुड़े परिवारों के लिए भारतीय सेना में भर्ती रोजगार के साथ-साथ प्रतिष्ठा और पारिवारिक विरासत का विषय भी है।
पोखरा में प्रदर्शन करने वाले पूर्व सैनिकों का कहना है कि भर्ती बंद रहने से नेपाली युवाओं के रोजगार के अवसर कम हुए हैं और गोरखा सैनिकों की पुरानी परंपरा पर भी असर पड़ रहा है।
भारतीय सेना प्रमुख की नेपाल यात्रा से पहले प्रदर्शन
पोखरा में यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है जब भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक उनका नेपाल दौरा 16 अगस्त से शुरू होने वाला है। इस दौरान भारत-नेपाल सैन्य संबंधों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं।
इसी वजह से पोखरा का प्रदर्शन और अग्निवीर भर्ती की मांग इस समय खास तौर पर चर्चा में है।
हालांकि प्रदर्शनकारियों की मांग और सेना प्रमुख की यात्रा के बीच सीधे तौर पर कोई आधिकारिक संबंध स्थापित नहीं किया गया है। यह प्रदर्शन पूर्व सैनिक संगठन की ओर से अपनी मांगों को लेकर किया गया है।
नेपाल के युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा मुद्दा
नेपाल लंबे समय से अपने युवाओं के विदेश रोजगार पर निर्भर रहा है। बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक भारत, खाड़ी देशों और दूसरे देशों में रोजगार के लिए जाते हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर भारतीय सेना में भर्ती का विकल्प खुलता है तो नेपाली युवाओं को अपने ही क्षेत्र में सैन्य करियर का एक प्रतिष्ठित अवसर मिल सकता है।
यही कारण है कि अग्निपथ योजना को लेकर नेपाल में केवल सैन्य या कूटनीतिक बहस नहीं हो रही, बल्कि इसे रोजगार और युवा अवसरों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या अब भारतीय सेना में नेपाली गोरखाओं की भर्ती शुरू होगी?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। पोखरा में प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपे जाने से भर्ती प्रक्रिया अपने आप शुरू नहीं होती।
मौजूदा स्थिति में नेपाल सरकार की सहमति और भारत-नेपाल के बीच इस मुद्दे पर स्पष्ट सहमति महत्वपूर्ण होगी। अग्निपथ योजना के तहत नेपाली नागरिकों की भर्ती का मुद्दा दोनों देशों के बीच लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है।
इसलिए प्रदर्शन के बाद अब निगाहें नेपाल सरकार के रुख और भारत-नेपाल के आधिकारिक संवाद पर रहेंगी।
एक नजर में पूरा मामला
| मुद्दा | जानकारी |
|---|---|
| कहां प्रदर्शन हुआ? | पोखरा, नेपाल |
| कब हुआ? | 12 अगस्त 2026 |
| किसने प्रदर्शन किया? | पूर्व गोरखा सैनिक, परिवार और नेपाली युवा |
| मुख्य मांग | भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती फिर शुरू हो |
| भर्ती कब से रुकी? | 2019 से प्रक्रिया बाधित |
| अग्निपथ कब शुरू हुआ? | 2022 |
| अग्निवीर सेवा अवधि | 4 वर्ष |
| स्थायी सेवा का प्रावधान | अधिकतम 25% तक |
| मुख्य विवाद | अग्निपथ और 1947 त्रिपक्षीय समझौते के बीच सामंजस्य |
| अगला अहम घटनाक्रम | भारतीय सेना प्रमुख की नेपाल यात्रा |
निष्कर्ष
नेपाल में गोरखा सैनिकों की भर्ती का मुद्दा एक बार फिर गर्म हो गया है। पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिकों और नेपाली युवाओं ने प्रदर्शन कर भारत की अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना में भर्ती दोबारा शुरू करने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि “भारतीय सेना में अग्निवीर भर्ती चाहिए, खाड़ी देशों की नौकरी नहीं।” उनके लिए यह मांग रोजगार, सम्मान और सदियों पुरानी गोरखा सैन्य परंपरा—तीनों से जुड़ी है।
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका नेपाल सरकार की होगी। यदि काठमांडू और नई दिल्ली के बीच अग्निपथ व्यवस्था को लेकर सहमति बनती है, तभी नेपाली युवाओं के लिए भारतीय सेना में भर्ती का रास्ता दोबारा खुल सकता है।





