ठाणे के गावदेवी मार्केट में भीषण आग, बचाव अभियान में फायर ऑफिसर समेत 2 की मौत

महाराष्ट्र के ठाणे शहर में एक दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे राज्य को झकझोर दिया। ठाणे रेलवे स्टेशन के पास स्थित गावदेवी (गामदेवी) सब्जी मार्केट में तड़के लगी भीषण आग ने न केवल बाजार को तबाह कर दिया, बल्कि दो लोगों की जान भी ले ली। मृतकों में एक बहादुर अग्निशमन अधिकारी और एक सुरक्षा गार्ड शामिल थे, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए।

आग कैसे लगी?

जानकारी के अनुसार आग सुबह लगभग 3:30 से 3:45 बजे के बीच गावदेवी मार्केट परिसर में लगी। यह बाजार ठाणे रेलवे स्टेशन के निकट स्थित है और यहां सब्जियों के साथ-साथ कपड़े, जूते, क्रॉकरी तथा अन्य सामानों की भी दुकानें थीं। आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरा परिसर घने धुएं और ऊंची लपटों से घिर गया।

प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग का संभावित कारण माना गया। बाजार में बड़ी मात्रा में कपड़े, प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी, जिसके कारण आग तेजी से फैल गई और देखते ही देखते 150 से अधिक दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया।

बचाव अभियान के दौरान हुई मौतें

हादसे की सबसे दुखद बात यह रही कि बचाव अभियान के दौरान दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान ठाणे नगर निगम के अग्निशमन विभाग के स्टेशन अधिकारी सागर सूर्यकांत शिंदे और सुरक्षा गार्ड कालू शंकर गाडेकर के रूप में हुई।

बताया गया कि जब आग लगी तब कालू गाडेकर इमारत के ऊपरी हिस्से में ड्यूटी पर थे। धुआं तेजी से फैलने के कारण वे अंदर ही फंस गए। उन्होंने मदद के लिए फोन भी किया। सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग मौके पर पहुंचा और स्टेशन अधिकारी सागर शिंदे उन्हें बचाने के लिए अंदर गए। लेकिन घना धुआं और बढ़ती आग दोनों के लिए जानलेवा साबित हुई। दोनों की मौत दम घुटने के कारण हो गई।

सागर शिंदे को उनके सहयोगियों ने एक साहसी और समर्पित अधिकारी बताया, जिन्होंने लोगों की जान बचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनके अंतिम संस्कार में नगर निगम अधिकारियों, राजनीतिक नेताओं और बड़ी संख्या में नागरिकों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

कई लोग घायल

आग बुझाने के दौरान अन्य अग्निशमन कर्मी भी घायल हुए। सुजीत पाश्टे, समीर जाधव और एक प्रशिक्षु फायरमैन धुएं और आग की चपेट में आ गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार किया गया।

घंटों चला आग बुझाने का अभियान

आग इतनी भयंकर थी कि उसे नियंत्रित करने में लगभग नौ घंटे लग गए। कई फायर इंजन, पानी के टैंकर और बचाव वाहन मौके पर तैनात किए गए। दमकल कर्मियों को बाजार के अंदर रखे ज्वलनशील सामान के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अंततः दोपहर तक आग पर काबू पाया जा सका।

व्यापारियों को भारी नुकसान

इस आग में 150 से अधिक दुकानें पूरी तरह जलकर राख हो गईं। कई व्यापारियों ने लाखों रुपये के नुकसान की बात कही। कुछ दुकानदारों ने बताया कि उन्होंने हाल ही में नया माल खरीदा था, जो पूरी तरह नष्ट हो गया। कई दुकानदारों के पास बीमा भी नहीं था, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा।

व्यापारियों ने आरोप लगाया कि बाजार में पर्याप्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी। उनका कहना था कि यदि उचित फायर सेफ्टी उपकरण मौजूद होते तो नुकसान कम हो सकता था।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार और ठाणे नगर निगम ने मृतकों के परिवारों के लिए 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की। साथ ही परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का भी आश्वासन दिया गया। घायल कर्मियों के लिए अलग से सहायता राशि घोषित की गई।

उपमुख्यमंत्री Eknath Shinde और नगर निगम अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया तथा सभी नगर निगम बाजारों का अग्नि और संरचनात्मक सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्णय लिया।

उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

इस हादसे ने एक बार फिर भीड़भाड़ वाले बाजारों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नेताओं और नागरिक संगठनों ने मांग की कि सभी सार्वजनिक भवनों, बाजारों और सरकारी परिसरों का तत्काल सुरक्षा निरीक्षण कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

निष्कर्ष

ठाणे के गावदेवी सब्जी मार्केट में लगी यह आग केवल एक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमियों की भी चेतावनी थी। इस हादसे में दो कर्मठ कर्मचारियों ने अपनी जान गंवाई, सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई और करोड़ों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई। घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि व्यस्त बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर आधुनिक अग्नि सुरक्षा उपायों का होना कितना आवश्यक है।

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