भारतीय रुपया दबाव में, एशियाई करेंसी क्यों दिखा रहीं मजबूती?
भारतीय रुपया क्यों कमजोर पड़ रहा? जानें मलेशिया, थाईलैंड और पाकिस्तान की करेंसी कैसे हुई मजबूत
भारतीय रुपया पिछले कुछ वर्षों से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दबाव में बना हुआ है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 62 प्रतिशत तक कमजोर हुआ है। वहीं दूसरी ओर मलेशिया, थाईलैंड और यहां तक कि पाकिस्तान जैसी अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी में अपेक्षाकृत मजबूती देखने को मिली है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर भारतीय रुपया क्यों कमजोर पड़ रहा है और दूसरे देशों की मुद्राएं कैसे बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।
डॉलर के मुकाबले क्यों टूटता है रुपया?
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विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी देश की करेंसी उसकी अर्थव्यवस्था, विदेशी निवेश, व्यापार घाटा और महंगाई जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। भारत में लगातार बढ़ते आयात बिल, खासकर कच्चे तेल की खरीद, रुपये पर दबाव बढ़ाते हैं।
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता जाता है।
विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव का असर
विदेशी निवेशक जब भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं तो रुपया और दबाव में आ जाता है। वैश्विक अनिश्चितता, अमेरिका की ब्याज दरें और अंतरराष्ट्रीय तनाव भी भारतीय मुद्रा को प्रभावित करते हैं।
इसके अलावा अमेरिका की मजबूत अर्थव्यवस्था और डॉलर की वैश्विक मांग भी रुपये को कमजोर करने वाला बड़ा कारण मानी जाती है।
मलेशिया और थाईलैंड की करेंसी क्यों मजबूत?
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मलेशिया और थाईलैंड की अर्थव्यवस्थाओं को पर्यटन, निर्यात और विदेशी मुद्रा भंडार से बड़ा फायदा मिलता है। इन देशों ने कई सेक्टर में मजबूत निर्यात आधारित मॉडल तैयार किया है।
प्रमुख कारण
- मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार
- निर्यात में बढ़ोतरी
- पर्यटन से बड़ी कमाई
- नियंत्रित महंगाई
- स्थिर आर्थिक नीतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि इन देशों की करेंसी पर बाहरी दबाव भारत की तुलना में कम देखने को मिला।
पाकिस्तान की करेंसी में मजबूती कैसे?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन हाल के समय में वहां की करेंसी में कुछ सुधार देखने को मिला है। इसके पीछे IMF सहायता, आयात नियंत्रण और डॉलर की सीमित उपलब्धता जैसे कारण बताए जाते हैं।
हालांकि आर्थिक विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान की मुद्रा में आई मजबूती स्थायी नहीं मानी जा सकती और वहां की अर्थव्यवस्था अभी भी गंभीर दबाव में है।
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रुपये की कमजोरी का आम लोगों पर असर
रुपये के कमजोर होने का असर सीधे आम लोगों की जेब पर पड़ता है।
क्या महंगा हो सकता है?
- पेट्रोल-डीजल
- इलेक्ट्रॉनिक सामान
- विदेश यात्रा
- आयातित वस्तुएं
- पढ़ाई और मेडिकल खर्च
इसके अलावा महंगाई बढ़ने का खतरा भी बना रहता है।
क्या फिर मजबूत हो सकता है रुपया?
अर्थशास्त्रियों के अनुसार अगर भारत में निर्यात बढ़ता है, विदेशी निवेश मजबूत होता है और व्यापार घाटा कम होता है तो रुपये को सहारा मिल सकता है। साथ ही रिजर्व बैंक की नीतियां और वैश्विक बाजार की स्थिति भी इसमें अहम भूमिका निभाएंगी।
भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में लंबे समय में मजबूत आर्थिक विकास रुपये को स्थिरता देने में मदद कर सकता है।





