50 साल बाद कर्नाटक के Upper Bhadra Project ने बदली तस्वीर, चित्रदुर्ग पहुंचा भद्रा का पानी????

50 साल बाद चित्रदुर्ग पहुंचा भद्रा का पानी, Upper Bhadra Project की बड़ी उपलब्धि...

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50 साल बाद कर्नाटक के Upper Bhadra Project ने बदली तस्वीर, चित्रदुर्ग पहुंचा भद्रा का पानी

Upper Bhadra Project: कर्नाटक के सूखाग्रस्त चित्रदुर्ग जिले के लिए करीब पांच दशक पुराना इंतजार अब एक ऐतिहासिक पड़ाव पर पहुंच गया है। Upper Bhadra Project के ट्रायल रन के तहत भद्रा जलाशय का पानी चित्रदुर्ग के गोनूर झील तक पहुंच गया है। हालांकि परियोजना को पूरी तरह से पूरा हुआ कहना अभी सही नहीं होगा, लेकिन पानी के गोनूर पहुंचने को परियोजना की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

50 साल का इंतजार हुआ खत्म

चित्रदुर्ग लंबे समय से पानी की कमी और सूखे की समस्या से जूझता रहा है। Upper Bhadra Project से इस इलाके को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने की योजना दशकों पहले बनाई गई थी।

10 सितंबर 2026 को भद्रा जलाशय से छोड़ा गया पानी चित्रदुर्ग शाखा नहर के रास्ते गोनूर झील तक पहुंचा। पानी के झील में पहुंचते ही स्थानीय लोगों और किसानों में खुशी का माहौल देखने को मिला।

पहले ट्रायल रन में छोड़ा गया 3 TMC पानी

Upper Bhadra Project के तहत चित्रदुर्ग शाखा नहर में करीब 3 TMC पानी ट्रायल के तौर पर छोड़ा गया। यह पानी भद्रा जलाशय से निकलकर तरीकेरे, अज्जमपुर, कडूर, होसदुर्गा और अन्य क्षेत्रों से होते हुए गोनूर झील तक पहुंचा।

इस ट्रायल का मकसद पानी के प्रवाह को जांचना और परियोजना से जुड़ी नहरों तथा वितरण व्यवस्था की कार्यक्षमता को परखना भी है।

Upper Bhadra Project क्या है?

Upper Bhadra Project कर्नाटक की एक बड़ी सिंचाई परियोजना है, जिसका उद्देश्य राज्य के मध्य हिस्से के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पानी पहुंचाना है।

परियोजना के तहत तुंगा नदी से 17.40 TMC पानी उठाकर भद्रा जलाशय तक पहुंचाने और वहां से आगे पानी उपलब्ध कराने की योजना है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार परियोजना में भद्रा जलाशय से 29.90 TMC पानी के उपयोग की परिकल्पना की गई है।

किन जिलों को मिलेगा फायदा?

परियोजना से कर्नाटक के कई सूखाग्रस्त तालुकों को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है। इसमें मुख्य रूप से—

  • चित्रदुर्ग
  • चिक्कमगलुरु
  • तुमकुरु
  • दावणगेरे

के क्षेत्र शामिल हैं।

New Indian Express के अनुसार परियोजना करीब 12 तालुकों को कवर करती है और लगभग 2.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई तथा 367 टैंकों को भरने का लक्ष्य रखती है।

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है परियोजना?

चित्रदुर्ग और आसपास के कई इलाके बारिश पर काफी निर्भर रहे हैं। पर्याप्त सिंचाई सुविधा नहीं होने की वजह से किसानों को सूखे और पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।

Upper Bhadra से नियमित पानी मिलने पर कृषि क्षेत्र को स्थायी जल स्रोत मिल सकता है। इससे सिंचाई क्षमता बढ़ने के साथ-साथ किसानों को फसल उत्पादन में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा जलाशयों और तालाबों में पानी पहुंचने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सुरक्षा मजबूत होने की संभावना है।

कर्नाटक का सबसे ऊंचा एक्वाडक्ट भी परियोजना का हिस्सा

Upper Bhadra Project की इंजीनियरिंग विशेषताओं में गोनूर के पास बनाया जा रहा एक्वाडक्ट भी महत्वपूर्ण है। इसकी लंबाई करीब 1.94 किलोमीटर और ऊंचाई लगभग 120 फीट बताई गई है। इसे कर्नाटक का सबसे ऊंचा एक्वाडक्ट बताया गया है।

यह संरचना पानी को ऊंचाई वाले इलाके से आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

क्या Upper Bhadra Project पूरी तरह पूरा हो गया?

यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है। पानी का गोनूर झील तक पहुंचना परियोजना की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इससे पूरी Upper Bhadra Project के 100% पूरा होने की पुष्टि नहीं होती।

कर्नाटक के Visvesvaraya Jala Nigam Limited के अनुसार परियोजना का काम पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2026 रखा गया था, लेकिन सितंबर 2026 में भी परियोजना के कुछ हिस्सों पर काम और ट्रायल गतिविधियां जारी थीं।

New Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के मंत्री टी. रघुमूर्ति ने परियोजना को 2028 तक पूरा करने के लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की है।

यानी “50 साल बाद पानी पहुंचा” कहना ज्यादा सटीक है, जबकि “50 साल बाद पूरा हुआ” कहना अभी पूरी तरह सही नहीं होगा।

केंद्र ने 5,300 करोड़ रुपये की सहायता का मुद्दा भी उठाया

Upper Bhadra Project को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर भी वित्तीय सहायता का मुद्दा महत्वपूर्ण रहा है। 2023-24 के केंद्रीय बजट में परियोजना के लिए 5,300 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी। राज्य सरकार की ओर से इस राशि को जारी करने की मांग लगातार उठाई जाती रही है।

सूखे इलाकों के लिए उम्मीद की नई किरण

गोनूर झील में भद्रा का पानी पहुंचना सिर्फ एक नहर परियोजना की तकनीकी उपलब्धि नहीं है। यह उन इलाकों के लिए बड़ी उम्मीद है जहां वर्षों से पानी की कमी के कारण खेती और ग्रामीण जीवन प्रभावित रहा है।

अगर परियोजना का बाकी काम भी निर्धारित तरीके से पूरा होता है और नियमित जल प्रवाह शुरू होता है, तो मध्य कर्नाटक के कई सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है।

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