दक्षिणी रेलवे ने हासिल किया 100% विद्युतीकरण का लक्ष्य, 5,068 किमी ब्रॉड गेज नेटवर्क हुआ इलेक्ट्रिक????
दक्षिणी रेलवे ने 5,068 किमी ब्रॉड गेज नेटवर्क का 100% विद्युतीकरण पूरा किया। जानें पट्टुकोट्टई-करीकुडी सेक्शन और इसके फायदे....
Southern Railway Electrification: दक्षिणी रेलवे ने अपने पूरे 5,068 रूट किलोमीटर (RKM) ब्रॉड गेज नेटवर्क का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। इसके साथ ही रेलवे जोन के पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन बिना ट्रैक्शन बदलने की जरूरत के किया जा सकेगा।
पट्टुकोट्टई-करीकुडी सेक्शन बना आखिरी कड़ी
दक्षिणी रेलवे के 100% विद्युतीकरण का लक्ष्य पट्टुकोट्टई-करीकुडी के अंतिम 71 रूट किलोमीटर सेक्शन के विद्युतीकरण के पूरा होने के बाद हासिल हुआ। इस नए विद्युतीकृत सेक्शन का वैधानिक निरीक्षण 9 सितंबर 2026 को दक्षिणी रेलवे के प्रधान मुख्य विद्युत अभियंता गणेश ने किया।
इस 71 किलोमीटर हिस्से के पूरा होने के साथ दक्षिणी रेलवे का पूरा 5,068 RKM ब्रॉड गेज नेटवर्क विद्युतीकृत हो गया।
अब ट्रेनों को नहीं बदलना पड़ेगा ट्रैक्शन
पूरे नेटवर्क के विद्युतीकरण का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दक्षिणी रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क पर ट्रेनों के संचालन के दौरान संबंधित स्थानों पर ट्रैक्शन बदलने की आवश्यकता नहीं होगी।
इससे इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा और ट्रेन संचालन में अधिक लचीलापन आएगा। रेलवे के अनुसार इससे सेवाओं की विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता में भी सुधार होने की उम्मीद है।
यात्रियों और रेलवे को क्या फायदा?
100 प्रतिशत विद्युतीकरण के बाद दक्षिणी रेलवे को कई स्तरों पर फायदा मिलने की उम्मीद है—
- इलेक्ट्रिक ट्रेनों का निर्बाध संचालन
- ट्रैक्शन बदलने में लगने वाला समय कम होगा
- लोकोमोटिव का बेहतर उपयोग
- ट्रेन संचालन में अधिक परिचालन लचीलापन
- ट्रेनों की आवाजाही अधिक कुशल हो सकेगी
- जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी
- ऊर्जा दक्षता में सुधार
- रेलवे के कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद
रेलवे ने इसे अधिक टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार रेल परिवहन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
1931 में शुरू हुआ था इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन का सफर
दक्षिणी रेलवे का इलेक्ट्रिफिकेशन इतिहास करीब 95 साल पुराना है। 11 मई 1931 को मद्रास में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन की शुरुआत हुई थी। उस समय मद्रास इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन शुरू करने वाला मुंबई के बाद भारत का दूसरा महानगर बना था।
इसके बाद 1968 में मद्रास बीच-तांबरम सेक्शन पर 25 kV AC विद्युतीकरण शुरू किया गया, जिसने दक्षिणी रेलवे में इलेक्ट्रिक रेल नेटवर्क के विस्तार को गति दी।
करीब नौ दशक बाद अब दक्षिणी रेलवे ने अपने पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क को इलेक्ट्रिक कर दिया है।
भारतीय रेलवे के लिए भी बड़ा कदम
दक्षिणी रेलवे का यह लक्ष्य ऐसे समय में पूरा हुआ है जब भारतीय रेलवे देशभर में ब्रॉड गेज नेटवर्क के विद्युतीकरण को मिशन मोड में आगे बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में रेलवे मंत्रालय के अनुसार भारतीय रेलवे के लगभग 99.6 प्रतिशत ब्रॉड गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण हो चुका था।
दक्षिणी रेलवे के 100% विद्युतीकरण के बाद देश के रेल नेटवर्क को अधिक ऊर्जा-कुशल और कम जीवाश्म ईंधन निर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है।
तेज और पर्यावरण के अनुकूल रेल संचालन की उम्मीद
इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से रेलवे को डीजल पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है। इससे लंबी अवधि में ईंधन लागत और उत्सर्जन को कम करने में योगदान मिल सकता है।
दक्षिणी रेलवे के पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क के विद्युतीकरण से अब ट्रेन संचालन को अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के लिहाज से बेहतर बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।
निष्कर्ष
दक्षिणी रेलवे ने 5,068 रूट किलोमीटर के अपने पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क का 100% विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। पट्टुकोट्टई-करीकुडी के 71 किलोमीटर अंतिम सेक्शन के विद्युतीकरण के साथ यह लक्ष्य पूरा हुआ। अब पूरे जोन में इलेक्ट्रिक ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू रूप से किया जा सकेगा और ट्रैक्शन बदलने की जरूरत कम होगी। यह उपलब्धि दक्षिणी रेलवे के करीब 95 वर्षों के इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सफर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।





