NSO की पहली जिला-स्तरीय Labour Market Report में सूरत का दबदबा, LFPR और WPR दोनों में हासिल किया पहला स्थान???
NSO Labour Market Report: सूरत ने हासिल किया पहला स्थान, LFPR और WPR में नंबर-1...
नई दिल्ली: भारत के श्रम बाजार की तस्वीर अब जिला स्तर पर भी सामने आने लगी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने पहली बार चयनित जिलों के लिए प्रमुख Labour Market Indicators जारी किए हैं। 18 सितंबर 2026 को जारी Labour Market Snapshot of Selected Districts में देश के 100 सबसे अधिक आबादी वाले जिलों के श्रम बाजार से जुड़े कई महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आए हैं। इस रिपोर्ट में गुजरात के सूरत जिले ने Labour Force Participation Rate (LFPR) और Worker Population Ratio (WPR), दोनों में सबसे ऊंचा स्तर दर्ज किया है।
पहली बार जिला स्तर पर सामने आया श्रम बाजार का डेटा
NSO की यह रिपोर्ट इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले श्रम बाजार से जुड़े आधिकारिक आंकड़े मुख्य रूप से व्यापक भौगोलिक क्षेत्रों के स्तर पर उपलब्ध होते थे। नई रिपोर्ट के जरिए अलग-अलग जिलों में श्रम बल की भागीदारी, रोजगार, बेरोजगारी और युवाओं के रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर रहने जैसी स्थिति का अधिक स्थानीय स्तर पर आकलन किया गया है।
रिपोर्ट में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी के लिए LFPR, WPR और Unemployment Rate (UR) जैसे संकेतकों का इस्तेमाल किया गया है। वहीं 15 से 29 वर्ष के युवाओं के लिए NEET Rate को भी शामिल किया गया है।
सूरत ने LFPR में हासिल किया पहला स्थान
रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 100 सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में सूरत का Labour Force Participation Rate 68.6 प्रतिशत रहा। इस मामले में सूरत पहले स्थान पर रहा।
बिहार का अररिया 68.0 प्रतिशत LFPR के साथ दूसरे और तमिलनाडु का सलेम 67.8 प्रतिशत के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
LFPR यह बताता है कि 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी में कितने लोग श्रम बल का हिस्सा हैं। इसमें वे लोग शामिल होते हैं जो काम कर रहे हैं या काम की तलाश कर रहे हैं अथवा काम करने के लिए उपलब्ध हैं।
LFPR में शीर्ष जिले
| स्थान | जिला | राज्य | LFPR |
|---|---|---|---|
| 1 | सूरत | गुजरात | 68.6% |
| 2 | अररिया | बिहार | 68.0% |
| 3 | सलेम | तमिलनाडु | 67.8% |
सूरत और अररिया के बीच LFPR का अंतर 0.6 प्रतिशत अंक का रहा।
Worker Population Ratio में भी सूरत नंबर-1
सूरत की खास उपलब्धि यह है कि वह केवल LFPR में ही शीर्ष पर नहीं रहा, बल्कि Worker Population Ratio (WPR) में भी सबसे आगे रहा।
सूरत का WPR 67.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद बिहार का अररिया 67.4 प्रतिशत और गुजरात का ही बनासकांठा 66.6 प्रतिशत के साथ अगले स्थानों पर रहे।
WPR 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की आबादी में वास्तव में रोजगार में लगे लोगों का अनुपात बताता है। इस तरह सूरत के आंकड़े श्रम बाजार में भागीदारी और रोजगार दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं।
WPR में शीर्ष जिले
| स्थान | जिला | राज्य | WPR |
|---|---|---|---|
| 1 | सूरत | गुजरात | 67.8% |
| 2 | अररिया | बिहार | 67.4% |
| 3 | बनासकांठा | गुजरात | 66.6% |
बेरोजगारी दर में भी सूरत का आंकड़ा कम
NSO की रिपोर्ट में बेरोजगारी दर के आंकड़े भी सामने आए हैं। 100 सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में पश्चिम बंगाल का South 24 Parganas और बिहार का अररिया 0.9 प्रतिशत बेरोजगारी दर के साथ सबसे कम स्तर पर रहे। गुजरात का अहमदाबाद 1.1 प्रतिशत पर रहा।
सूरत की बेरोजगारी दर 1.2 प्रतिशत दर्ज की गई। इसी स्तर पर गुजरात का बनासकांठा और उत्तर प्रदेश के बरेली तथा बुलंदशहर भी रहे।
युवाओं के NEET आंकड़े भी रिपोर्ट में शामिल
NSO की पहली जिला-स्तरीय Labour Market रिपोर्ट में केवल रोजगार और बेरोजगारी ही नहीं, बल्कि युवाओं की स्थिति भी दर्ज की गई है।
15 से 29 वर्ष की उम्र के उन युवाओं को NEET श्रेणी में रखा गया है जो न रोजगार में हैं, न शिक्षा में और न ही किसी प्रशिक्षण में।
100 सबसे अधिक आबादी वाले जिलों में केरल के एर्नाकुलम में NEET दर सबसे कम 9.6 प्रतिशत रही। इसके बाद तमिलनाडु का कोयंबटूर 14.5 प्रतिशत और कर्नाटक का बेंगलुरु अर्बन 15.0 प्रतिशत पर रहा। सूरत में यह दर 17.2 प्रतिशत दर्ज की गई।
महिला श्रम भागीदारी में सामने आई बड़ी तस्वीर
रिपोर्ट में महिलाओं की श्रम बाजार में भागीदारी को भी अलग से देखा गया है। इसके लिए प्रत्येक राज्य के महिला आबादी के हिसाब से 10 सबसे बड़े जिलों में से प्रमुख जिलों की तुलना की गई।
हिमाचल प्रदेश का हमीरपुर इस तुलना में महिला LFPR के मामले में 80.9 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर रहा। उसका महिला WPR 80.0 प्रतिशत दर्ज किया गया।
ओडिशा के मयूरभंज, जम्मू-कश्मीर के बडगाम और छत्तीसगढ़ के सरगुजा जैसे जिलों में भी महिला श्रम भागीदारी के अपेक्षाकृत ऊंचे आंकड़े सामने आए हैं।
देश के जिलों में श्रम बाजार की तस्वीर अलग-अलग
NSO के आंकड़ों से पता चलता है कि देश के अलग-अलग जिलों में श्रम बाजार की स्थिति एक जैसी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार करीब 98.8 प्रतिशत जिलों में LFPR और करीब 98.3 प्रतिशत जिलों में WPR 40 से 80 प्रतिशत के बीच रहा।
वहीं करीब 77.8 प्रतिशत जिलों में बेरोजगारी दर 0.5 से 5.5 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई। इससे जिला स्तर पर रोजगार और श्रम भागीदारी की विविधता को समझने में मदद मिलती है।
सूरत की अर्थव्यवस्था का श्रम बाजार से संबंध
सूरत गुजरात का एक प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र है। शहर और जिले की अर्थव्यवस्था में टेक्सटाइल, डायमंड प्रोसेसिंग, व्यापार तथा विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
NSO के आंकड़ों में सूरत का ऊंचा LFPR और WPR इसी व्यापक श्रम बाजार तस्वीर का एक सांख्यिकीय संकेतक है। हालांकि, केवल LFPR या WPR के आधार पर रोजगार की गुणवत्ता, आय या काम की स्थिरता के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
जिला स्तर के आंकड़े क्यों हैं महत्वपूर्ण?
भारत जैसे बड़े देश में राष्ट्रीय स्तर के औसत आंकड़े अक्सर अलग-अलग क्षेत्रों के बीच मौजूद अंतर को पूरी तरह नहीं दिखा पाते। जिला स्तर के आंकड़े नीति निर्माताओं को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि किन क्षेत्रों में श्रम भागीदारी अधिक है, कहां बेरोजगारी अपेक्षाकृत अधिक है और किन जिलों में युवाओं की बड़ी संख्या रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर है।
ऐसे आंकड़ों का इस्तेमाल रोजगार योजनाओं, कौशल विकास कार्यक्रमों और स्थानीय स्तर की आर्थिक नीतियों को तैयार करने में किया जा सकता है। हालांकि, रोजगार की गुणवत्ता और आय जैसी चीजों के आकलन के लिए अन्य आंकड़ों को भी साथ में देखना जरूरी होगा।
पहली रिपोर्ट ने खोला जिला-स्तरीय रोजगार डेटा का रास्ता
NSO की यह रिपोर्ट भारत के श्रम बाजार के आंकड़ों को स्थानीय स्तर पर समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सूरत का LFPR और WPR दोनों में शीर्ष पर रहना इस रिपोर्ट की प्रमुख सुर्खियों में शामिल है।
रिपोर्ट से यह भी सामने आया कि अलग-अलग जिलों में श्रम भागीदारी, रोजगार, बेरोजगारी और युवाओं की स्थिति में काफी अंतर है। आने वाले समय में ऐसे आंकड़े रोजगार नीति और स्थानीय आर्थिक योजना के लिए उपयोगी आधार प्रदान कर सकते हैं।
निष्कर्ष
NSO की पहली जिला-स्तरीय Labour Market Snapshot में गुजरात का सूरत जिला 100 सबसे अधिक आबादी वाले जिलों के बीच LFPR और WPR दोनों में शीर्ष पर रहा। सूरत का LFPR 68.6 प्रतिशत और WPR 67.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं बेरोजगारी दर 1.2 प्रतिशत रही। रिपोर्ट ने पहली बार जिला स्तर पर श्रम बाजार के कई प्रमुख संकेतकों की तस्वीर सामने रखी है, जिससे भारत में रोजगार और श्रम भागीदारी को स्थानीय स्तर पर समझने का नया आधार मिला है।





