23 सितंबर को मनाया गया अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस 2026, ‘बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा’ रहा विषय???
23 सितंबर 2026 को मनाया गया अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस....
नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026: दुनियाभर में 23 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस मनाया गया। यह दिवस बधिर लोगों के मानवाधिकारों को सुनिश्चित करने, सांकेतिक भाषाओं की पहचान और उनके इस्तेमाल को बढ़ावा देने तथा समाज में समान भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वर्ष 2026 में इस दिवस का विषय “Declaring Deaf People’s Human Rights” यानी “बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा” रखा गया।
23 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है?
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के लिए 23 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण है। इसी दिन वर्ष 1951 में World Federation of the Deaf (WFD) की स्थापना हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दिसंबर 2017 में 23 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस घोषित किया था और पहली बार यह दिवस 2018 में मनाया गया।
इस दिवस का उद्देश्य यह बताना है कि सांकेतिक भाषाएं केवल हाथों के इशारों का माध्यम नहीं हैं, बल्कि अपनी अलग व्याकरण, संरचना और भाषाई विशेषताओं वाली पूर्ण प्राकृतिक भाषाएं हैं।
2026 की थीम ‘Declaring Deaf People’s Human Rights’
वर्ष 2026 में अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस की थीम “Declaring Deaf People’s Human Rights” रही। इसका मुख्य जोर बधिर लोगों के मानवाधिकारों को केवल मान्यता देने तक सीमित न रखकर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सूचना, सार्वजनिक सेवाओं और सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में व्यवहारिक रूप से सुनिश्चित करने पर है।
इस वर्ष की थीम के तहत राष्ट्रीय सांकेतिक भाषाओं के माध्यम से बधिर लोगों की पूर्ण और समान भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
2026 में दो बड़ी उपलब्धियां भी जुड़ीं
वर्ष 2026 अंतरराष्ट्रीय बधिर समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष World Federation of the Deaf की स्थापना के 75 वर्ष पूरे हुए हैं।
इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के Convention on the Rights of Persons with Disabilities (CRPD) को अपनाए जाने के भी 20 वर्ष पूरे हुए हैं। CRPD ने सांकेतिक भाषाओं की पहचान और बधिर लोगों के अधिकारों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
दुनिया में 300 से अधिक सांकेतिक भाषाएं
World Federation of the Deaf के अनुसार दुनियाभर में 70 मिलियन से अधिक बधिर लोग हैं और वे सामूहिक रूप से 300 से अधिक अलग-अलग सांकेतिक भाषाओं का इस्तेमाल करते हैं। अलग-अलग देशों और समुदायों में सांकेतिक भाषाओं की अपनी शब्दावली, व्याकरण और संरचना हो सकती है।
इसलिए सांकेतिक भाषा को किसी एक सार्वभौमिक भाषा के रूप में नहीं देखा जा सकता। विभिन्न देशों में स्थानीय या राष्ट्रीय सांकेतिक भाषाओं का इस्तेमाल होता है।
शिक्षा और सूचना तक पहुंच में सांकेतिक भाषा की भूमिका
सांकेतिक भाषा बधिर बच्चों और वयस्कों के लिए शिक्षा, सूचना और सामाजिक संवाद तक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, बच्चों को कम उम्र में सांकेतिक भाषा तक पहुंच मिलना उनके विकास और शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
शिक्षण संस्थानों में सांकेतिक भाषा की उपलब्धता से बधिर विद्यार्थियों को पढ़ाई में भाग लेने और अपनी भाषाई पहचान विकसित करने में मदद मिल सकती है।
मानवाधिकारों से सीधे जुड़ा मुद्दा
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस केवल जागरूकता का दिवस नहीं है, बल्कि यह मानवाधिकार और समान भागीदारी से भी जुड़ा हुआ है। अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों, अदालतों, शैक्षणिक संस्थानों और डिजिटल सेवाओं में बधिर लोगों के लिए सुलभ संचार व्यवस्था उपलब्ध होना समावेशी समाज के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
संयुक्त राष्ट्र का CRPD सांकेतिक भाषाओं को मान्यता देता है और उनके सीखने तथा इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देता है।
International Week of Deaf People भी मनाया गया
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस International Week of Deaf People का भी हिस्सा है। वर्ष 2026 में यह सप्ताह 21 से 27 सितंबर तक मनाया गया और इसकी भी मुख्य थीम “Declaring Deaf People’s Human Rights” रही। World Federation of the Deaf ने इस सप्ताह के दौरान शिक्षा, पहुंच, बधिर संस्कृति और मानवाधिकारों से जुड़े अलग-अलग विषयों पर ध्यान केंद्रित किया।
23 सितंबर को विशेष रूप से बधिर लोगों के मानवाधिकारों की घोषणा पर जोर दिया गया, जबकि सप्ताह के अन्य दिनों में समावेशी शिक्षा, राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा, पहुंच और बधिर संस्कृति जैसे मुद्दे उठाए गए।
भारत में सांकेतिक भाषा का महत्व
भारत में Indian Sign Language (ISL) बधिर और कम सुनने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण संचार माध्यम है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत Indian Sign Language Research and Training Centre (ISLRTC) सांकेतिक भाषा से संबंधित शोध, प्रशिक्षण और संसाधन विकास पर काम करता है।
भारत में सांकेतिक भाषा को बढ़ावा देने से शिक्षा, रोजगार, सरकारी सेवाओं और सार्वजनिक सूचना तक बधिर लोगों की पहुंच बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
जागरूकता बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां
अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर दुनियाभर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। World Federation of the Deaf ने 2026 में सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख इमारतों को नीली रोशनी से रोशन करने तथा Global Deaf Flag फहराने जैसी गतिविधियों का भी आह्वान किया।
इन गतिविधियों का उद्देश्य सांकेतिक भाषाओं और बधिर समुदाय के अधिकारों को व्यापक समाज तक पहुंचाना है।
निष्कर्ष
23 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस बधिर लोगों के अधिकारों और सांकेतिक भाषाओं की भूमिका के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया गया। इस वर्ष की थीम “Declaring Deaf People’s Human Rights” रही।
2026 में World Federation of the Deaf की स्थापना के 75 वर्ष और CRPD के 20 वर्ष पूरे होने के कारण यह वर्ष विशेष महत्व रखता है। यह दिवस इस बात पर जोर देता है कि सांकेतिक भाषा तक पहुंच केवल संचार का विषय नहीं, बल्कि शिक्षा, सूचना, संस्कृति और मानवाधिकारों में समान भागीदारी से जुड़ा मुद्दा है।






