FIPIC Foreign Ministers Meeting 2026 : – विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में दूसरी FIPIC विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता की???
एस जयशंकर ने न्यूयॉर्क में दूसरी FIPIC विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता की...
नई दिल्ली/न्यूयॉर्क, 25 सितंबर 2026: भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक न्यूयॉर्क में आयोजित की गई। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र से इतर फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (FIPIC) के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने तथा क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
FIPIC की दूसरी विदेश मंत्रियों की बैठक
न्यूयॉर्क में आयोजित यह बैठक FIPIC के तहत विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक थी। इसमें भारत और प्रशांत द्वीप देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान FIPIC शिखर सम्मेलनों के परिणामों की समीक्षा की गई और भारत तथा प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग में हुई प्रगति पर चर्चा की गई।
बैठक में 2023 में घोषित 12 सूत्रीय कार्ययोजना के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इस कार्ययोजना में स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी, तकनीक और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया है।
किन देशों ने लिया हिस्सा?
बैठक में कई प्रशांत द्वीप देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। इसमें फिजी, मार्शल आइलैंड्स, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन आइलैंड्स और तुवालु के विदेश मंत्री शामिल थे।
इसके अलावा समोआ के उप प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री, टोंगा के वित्त मंत्री, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्यों के न्याय विभाग के सचिव एवं अटॉर्नी जनरल, वानुअतु के स्वास्थ्य मंत्री, नाउरू के उप विदेश मंत्री और पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के महासचिव ने भी बैठक में भाग लिया।
किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
बैठक में भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विचार-विमर्श हुआ। इनमें प्रमुख रूप से—
- नवीकरणीय ऊर्जा
- जलवायु परिवर्तन और जलवायु कार्रवाई
- आपदा प्रबंधन एवं आपदा लचीलापन
- शिक्षा
- स्वास्थ्य
- क्षमता निर्माण
- सतत विकास
- क्षेत्रीय और बहुपक्षीय सहयोग
शामिल रहे। बैठक में FIPIC साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
प्रशांत द्वीप देशों के लिए भारत का विकास सहयोग
बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत की विकास साझेदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रशांत द्वीप देशों के साथ भारत का सहयोग उनकी जरूरतों और प्राथमिकताओं पर आधारित है।
जयशंकर ने FIPIC फ्रेमवर्क और India-UN Development Partnership Fund के माध्यम से किए जा रहे विकास कार्यों का उल्लेख किया। इन पहलों के तहत आजीविका मजबूत करने, क्षमता निर्माण और सतत विकास को बढ़ावा देने पर काम किया जा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सहयोग
भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जा रहा है। बैठक में फिजी में बन रहे 100-बेड वाले सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल की प्रगति का उल्लेख किया गया।
इसके अलावा भारत की ओर से कई प्रशांत द्वीप देशों को हीमोडायलिसिस मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। भारत ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा क्षमता को मजबूत करने के लिए सहयोग जारी रखने की बात कही है।
डिजिटल और तकनीकी क्षमता निर्माण पर जोर
बैठक में डिजिटल क्षमता निर्माण को भी महत्वपूर्ण विषय के रूप में सामने रखा गया। भारत ने प्रशांत द्वीप देशों में आईटी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने और स्थानीय प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने की दिशा में सहयोग किया है।
भारत के अनुसार फिजी, पापुआ न्यू गिनी, कुक आइलैंड्स, वानुअतु, नाउरू, नियू, सोलोमन आइलैंड्स और मार्शल आइलैंड्स में इस तरह की पहल पूरी की जा चुकी है।
सौर ऊर्जा और जलवायु सहयोग
भारत ने प्रशांत द्वीप देशों में नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 14 प्रशांत द्वीप देशों में 2,800 घरों का सोलराइजेशन किया गया है और 70 महिला सोलर इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया गया है।
बैठक में जलवायु परिवर्तन और आपदा लचीलापन जैसे मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। प्रशांत द्वीप देश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील माने जाते हैं, इसलिए इस क्षेत्र में भारत की विकास साझेदारी को महत्वपूर्ण विषय के रूप में रखा गया।
2050 Strategy for the Blue Pacific Continent का समर्थन
एस. जयशंकर ने कहा कि भारत Pacific Islands Forum की 2050 Strategy for the Blue Pacific Continent में निर्धारित प्राथमिकताओं का सम्मान और समर्थन करता है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रशांत द्वीप देशों के साथ मिलकर जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और आपदा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
International Solar Alliance और CDRI में सहयोग
बैठक के दौरान International Solar Alliance (ISA) और Coalition for Disaster Resilient Infrastructure (CDRI) के माध्यम से सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
भारत ने प्रशांत द्वीप देशों को इन पहलों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। इन मंचों के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा और आपदा-रोधी बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
FIPIC क्या है?
FIPIC यानी Forum for India-Pacific Islands Cooperation भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसका उद्देश्य प्रशांत क्षेत्र के देशों के साथ विकास, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य, शिक्षा, जलवायु, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है।
FIPIC के माध्यम से भारत प्रशांत द्वीप देशों की प्राथमिकताओं के अनुरूप विकास परियोजनाओं और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में सहयोग करता रहा है।
2023 के FIPIC Summit के बाद प्रगति की समीक्षा
न्यूयॉर्क बैठक में 2023 में हुए तीसरे FIPIC Summit के बाद हुई प्रगति की समीक्षा भी की गई। विशेष रूप से 2023 में घोषित 12 सूत्रीय कार्ययोजना के तहत स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा, तकनीक, कनेक्टिविटी और क्षमता निर्माण से संबंधित पहलों पर चर्चा हुई।
भारत ने प्रशांत द्वीप देशों से स्थानीय समुदायों को सीधे लाभ पहुंचाने वाली Quick Impact Projects के प्रस्ताव भी प्रस्तुत करने का आग्रह किया है।
निष्कर्ष
न्यूयॉर्क में हुई FIPIC की दूसरी विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत और प्रशांत द्वीप देशों ने अपनी साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, आपदा लचीलापन, स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
बैठक में 2023 के FIPIC Summit के बाद हुई प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ आने वाले समय में भारत और प्रशांत द्वीप देशों के बीच विकास साझेदारी को और व्यापक बनाने के रास्तों पर चर्चा की गई।






