विशाखापत्तनम में भारत की समुद्री ताकत को मिली नई मजबूती, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पहला फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्य’ किया लॉन्च ???

विशाखापत्तनम में राजनाथ सिंह ने लॉन्च किया भारत का पहला फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्य’, जानें इसकी खासियत...

विशाखापत्तनम: भारत की समुद्री और स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में भारतीय नौसेना के पहले स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS-1) ‘सूर्य’ को लॉन्च किया। यह जहाज भारतीय नौसेना की समुद्र में लंबे समय तक संचालन क्षमता और पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

43,500 टन वजनी है ‘सूर्य’

फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्य’ का वजन करीब 43,500 टन है। यह पांच फ्लीट सपोर्ट शिप के कार्यक्रम का पहला जहाज है। इन जहाजों को स्वदेशी रूप से हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा डिजाइन और निर्मित किया जा रहा है। परियोजना में 82 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

समुद्र में युद्धपोतों को मिलेगा जरूरी सपोर्ट

फ्लीट सपोर्ट शिप का मुख्य काम समुद्र में तैनात नौसैनिक युद्धपोतों को जरूरी रसद और अन्य सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे जहाज समुद्र में ही ईंधन और अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति कर सकते हैं, जिससे युद्धपोतों को बार-बार तट पर लौटने की जरूरत कम होती है।

इससे भारतीय नौसेना के युद्धपोत और कैरियर बैटल ग्रुप लंबे समय तक समुद्र में ऑपरेशन जारी रख सकेंगे। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, FSS भारतीय नौसेना की रीच, एंड्योरेंस और ऑपरेशनल इफेक्टिवनेस को बढ़ाने में मदद करेंगे।

हेलीकॉप्टर संचालन की भी सुविधा

‘सूर्य’ जैसे फ्लीट सपोर्ट शिप में बड़ी मात्रा में कार्गो और तरल सामग्री रखने की क्षमता होगी। इसके अलावा जहाज में फर्स्ट-लाइन मेंटेनेंस वर्कशॉप और मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर के संचालन के लिए हेलीकॉप्टर डेक भी उपलब्ध होगा।

इन सुविधाओं की वजह से जहाज केवल रसद आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समुद्र में नौसैनिक अभियानों के दौरान रखरखाव और सहायता संबंधी गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।

18 महीने में समुद्र में उतरा पहला जहाज

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, FSS-1 को स्टील कटिंग के लगभग 18 महीने बाद लॉन्च किया गया। इसे भारतीय जहाज निर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। यह जहाज लॉन्च होने के बाद बेड़े में शामिल किए जाने से पहले आवश्यक परीक्षण और अन्य प्रक्रियाओं से गुजरेगा।

पांचवें फ्लीट सपोर्ट शिप की भी रखी गई कील

कार्यक्रम के दौरान राजनाथ सिंह ने केवल पहले फ्लीट सपोर्ट शिप ‘सूर्य’ को ही लॉन्च नहीं किया, बल्कि FSS-5 यानी पांचवें फ्लीट सपोर्ट शिप की कील भी रखी। इसके साथ ही HSL में अपग्रेड किए गए Slipway-4 और 300 टन क्षमता वाले Goliath Crane का भी उद्घाटन किया गया।

नई सुविधाओं से HSL को बड़े और जटिल जहाजों के निर्माण में मदद मिलेगी। अपग्रेड किए गए Slipway-4 और नई क्रेन की मदद से शिपयार्ड 45,000 DWT तक के जहाजों के निर्माण और लॉन्च की क्षमता हासिल करेगा।

राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम को Maritime Industrial Hub बनाने पर दिया जोर

रक्षा मंत्री ने विशाखापत्तनम को देश के प्रमुख Maritime Industrial Hub के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहर में Eastern Naval Command, Naval Dockyard, Hindustan Shipyard और Visakhapatnam Port जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएं मौजूद हैं, जो एक मजबूत समुद्री औद्योगिक इकोसिस्टम की नींव तैयार करती हैं।

उन्होंने भारतीय जहाज निर्माण क्षेत्र को केवल आत्मनिर्भरता तक सीमित न रखते हुए वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत बताई। इसके लिए बेहतर गुणवत्ता, समय पर डिलीवरी, स्वदेशी डिजाइन, कुशल मानव संसाधन और लागत प्रतिस्पर्धा जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देने की बात कही गई।

आपदा और राहत कार्यों में भी होगा इस्तेमाल

फ्लीट सपोर्ट शिप का इस्तेमाल केवल सैन्य अभियानों के लिए नहीं होगा। इनके द्वितीयक कार्यों में Humanitarian Aid and Disaster Relief (HADR) तथा Non-Combatant Evacuation Operations (NEO) भी शामिल हैं।

इसका मतलब है कि प्राकृतिक आपदा या किसी आपात स्थिति में इन जहाजों का इस्तेमाल राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक निकालने के लिए भी किया जा सकेगा।

हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ेगी नौसेना की क्षमता

भारत की समुद्री सुरक्षा और हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की मौजूदगी के लिहाज से फ्लीट सपोर्ट शिप महत्वपूर्ण हैं। समुद्र में युद्धपोतों को लगातार ईंधन, सामग्री और तकनीकी सहायता उपलब्ध होने से उनकी ऑपरेशनल एंड्योरेंस बढ़ेगी।

‘सूर्य’ का लॉन्च भारतीय नौसेना के लिए इसलिए भी अहम है क्योंकि इससे स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता के साथ-साथ भारत की समुद्री लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूती मिलेगी।

Back to top button