शर्मिला मोना सिन्हा ने रचा इतिहास, National Women’s Hall of Fame में शामिल होने वाली दूसरी भारतीय मूल की महिला ???
वह इंदिरा नूयी के बाद यह सम्मान पाने वाली दूसरी भारतीय मूल की महिला हैं...
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: भारतीय मूल की अमेरिकी समाजसेवी और महिला अधिकारों की पैरोकार शर्मिला मोना सिन्हा ने अमेरिका में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें न्यूयॉर्क के Seneca Falls स्थित National Women’s Hall of Fame में शामिल किया गया है। इसके साथ ही वह इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाली दूसरी भारतीय मूल की महिला बन गई हैं। उनसे पहले इंदिरा नूयी को इस हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया था।
शर्मिला मोना सिन्हा को 24 सितंबर 2026 को नेशनल वुमेन्स हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। यह संस्था अमेरिकी महिलाओं की उपलब्धियों और समाज में उनके योगदान को सम्मानित करने के लिए जानी जाती है। सिन्हा अब उन करीब 300 प्रभावशाली महिलाओं की सूची का हिस्सा हैं, जिन्हें इस प्रतिष्ठित संस्थान में स्थान मिला है।
कोलकाता में हुआ जन्म, 18 साल की उम्र में गईं अमेरिका
शर्मिला मोना सिन्हा का जन्म और बचपन कोलकाता में बीता। उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में उच्च शिक्षा के लिए भारत छोड़ा और अमेरिका के Smith College में दाखिला लिया। यहां उन्होंने अर्थशास्त्र और कला इतिहास की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने Columbia Business School से MBA की डिग्री हासिल की।
शर्मिला ने अपने करियर की शुरुआत वॉल स्ट्रीट से की। वह Morgan Stanley में इन्वेस्टमेंट बैंकर के रूप में काम कर चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने Procter & Gamble, Unilever और Elizabeth Arden जैसी बड़ी कंपनियों में भी जिम्मेदारियां संभालीं।
कॉरपोरेट करियर से महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई तक
शर्मिला मोना सिन्हा ने बाद में अपना ध्यान सामाजिक क्षेत्र और महिला अधिकारों की ओर केंद्रित किया। वह महिलाओं और लड़कियों के लिए समान अधिकार, शिक्षा, नेतृत्व और अवसरों को बढ़ावा देने वाले कई अभियानों से जुड़ीं।
वह Women Moving Millions की नेतृत्व टीम का हिस्सा रहीं। इस नेटवर्क से जुड़े परोपकारी लोगों ने महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों से जुड़े संगठनों के लिए करीब एक अरब डॉलर की प्रतिबद्धता जताई है। इसके अलावा उन्होंने सामाजिक प्रभाव वाले संगठनों की मदद करने वाली पहल Raising Change की सह-स्थापना भी की।
Equality Now की CEO हैं शर्मिला सिन्हा
शर्मिला मोना सिन्हा वर्तमान में वैश्विक महिला अधिकार संगठन Equality Now की CEO हैं। संगठन महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ होने वाली हिंसा, भेदभाव तथा कानूनी असमानताओं के मुद्दों पर काम करता है।
नेशनल वुमेन्स हॉल ऑफ फेम के 2026 इंडक्टी प्रोफाइल में भी उन्हें वैश्विक स्तर पर जेंडर इक्वालिटी की प्रमुख आवाज और महिलाओं के अधिकारों के लिए कानूनी सुधारों को आगे बढ़ाने वाली नेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
मां से मिली ‘मुट्ठी भर चावल’ की सीख
सम्मान मिलने के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए सिन्हा ने अपनी मां की एक पुरानी आदत का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कोलकाता में उनकी मां रोजाना चावल के डिब्बे से एक मुट्ठी चावल अलग रखती थीं और महीने के अंत में इसे किसी जरूरतमंद को दे देती थीं।
सिन्हा के अनुसार, इस छोटी-सी आदत ने उन्हें यह समझने में मदद की कि किसी के पास बहुत अधिक संसाधन न हों, तब भी वह दूसरों की मदद कर सकता है। उन्होंने अपने हॉल ऑफ फेम सम्मान को भी इसी भावना से जोड़ते हुए कहा कि वह इसे केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि आगे दूसरों तक पहुंचाने वाली जिम्मेदारी के रूप में देखती हैं।
इंदिरा नूयी के बाद दूसरी भारतीय मूल की महिला
शर्मिला मोना सिन्हा से पहले इंदिरा नूयी National Women’s Hall of Fame में शामिल होने वाली भारतीय मूल की महिला थीं। इस तरह सिन्हा इस प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाने वाली दूसरी भारतीय मूल की महिला बन गई हैं।
National Women’s Hall of Fame में उनके साथ अमेरिका और दुनिया की कई प्रसिद्ध महिला हस्तियां शामिल हैं। इस सूची में मैडलिन अलब्राइट, माया एंजेलो, जेनेट येलेन, रोजा पार्क्स और मिशेल ओबामा जैसी महिलाएं भी शामिल हैं।
महिलाओं की शिक्षा और नेतृत्व पर जोर
सिन्हा का काम केवल महिलाओं के अधिकारों तक सीमित नहीं है। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, नेतृत्व और सामाजिक बदलाव के लिए संसाधन जुटाने पर भी जोर दिया है। वह Smith College और Columbia Business School से शिक्षा प्राप्त करने के बाद कॉरपोरेट क्षेत्र में सफल करियर बनाने के बावजूद सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हुईं।
उनकी कहानी को खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने वित्त और कॉरपोरेट जगत में हासिल अनुभव को महिला अधिकारों और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में इस्तेमाल किया।
नेशनल वुमेन्स हॉल ऑफ फेम में नई पहचान
National Women’s Hall of Fame में शामिल होना शर्मिला मोना सिन्हा के लिए व्यक्तिगत सम्मान के साथ-साथ भारतीय मूल की महिलाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका करियर वॉल स्ट्रीट से शुरू होकर वैश्विक स्तर पर महिलाओं के अधिकारों और समानता की वकालत तक पहुंचा है।
2026 में उन्हें मिली यह मान्यता उनके लंबे सामाजिक और पेशेवर योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान के तौर पर देखी जा रही है।






