रात में नींद नहीं आती या बार-बार खुल जाती है आंख? इन 10 आदतों से सुधरेगी Sleep Quality, दिनभर रहेंगे तरोताजा ???

रात में नींद नहीं आती? इन 10 आदतों से बेहतर होगी Sleep Quality...

How To Improve Sleep Quality Naturally: अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त नींद लेना उतना ही जरूरी है, जितना संतुलित खानपान और नियमित एक्सरसाइज करना। लेकिन आजकल बदलती जीवनशैली, काम का तनाव, मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल और अनियमित दिनचर्या के कारण बड़ी संख्या में लोग नींद से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कुछ लोगों को रात में देर तक नींद नहीं आती, तो कुछ की आंख बार-बार खुल जाती है। वहीं, कई लोग 7 से 8 घंटे बिस्तर पर रहने के बावजूद सुबह उठने पर थकान और सुस्ती महसूस करते हैं।

नींद पूरी न होने का असर केवल अगले दिन के मूड पर ही नहीं पड़ता, बल्कि इससे एकाग्रता, याददाश्त, काम करने की क्षमता और शारीरिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक नींद की कमी रहने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

अमेरिका के नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट (NHLBI) के अनुसार, अच्छी नींद के लिए नियमित समय पर सोना, आरामदायक वातावरण बनाना और सोने से पहले कुछ आदतों में बदलाव करना जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसी 10 आसान आदतों के बारे में, जिन्हें अपनाकर आप अपनी स्लीप क्वालिटी बेहतर कर सकते हैं।

1. रोजाना एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें

अगर आप अपनी नींद की गुणवत्ता सुधारना चाहते हैं तो सबसे पहले सोने और जागने का समय निर्धारित करें। कोशिश करें कि रोजाना रात में एक ही समय पर सोएं और सुबह भी तय समय पर उठें।

ऐसा करने से शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी यानी बॉडी क्लॉक को नियमित रहने में मदद मिलती है। छुट्टी वाले दिन भी सोने और जागने के समय में बहुत ज्यादा बदलाव न करें।

विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित स्लीप शेड्यूल अच्छी नींद की सबसे महत्वपूर्ण आदतों में से एक है।

2. सोने से पहले मोबाइल और टीवी से बनाएं दूरी

आजकल ज्यादातर लोग रात में बिस्तर पर जाने के बाद भी मोबाइल चलाते रहते हैं। कोई सोशल मीडिया देखता है तो कोई वीडियो और वेब सीरीज देखने में समय बिताता है।

इस आदत के कारण सोने का समय लगातार आगे बढ़ सकता है। मोबाइल और अन्य स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी भी शरीर की नींद-जागने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

इसलिए सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी से दूरी बनाने की कोशिश करें। इस समय किताब पढ़ना या हल्का संगीत सुनना बेहतर विकल्प हो सकता है।

3. दिन में ज्यादा देर तक न सोएं

अगर आपको रात में नींद आने में परेशानी होती है तो दिन में लंबी झपकी लेने से बचें। खासतौर पर शाम के समय सोने से रात की नींद प्रभावित हो सकती है।

अगर दिन में बहुत ज्यादा थकान महसूस होती है तो छोटी झपकी ले सकते हैं। कोशिश करें कि यह 20 मिनट से ज्यादा न हो और देर शाम झपकी लेने से बचें।

4. सोने से पहले चाय और कॉफी पीने से बचें

चाय और कॉफी में कैफीन मौजूद होता है, जो दिमाग को सक्रिय रखता है। इसका असर कई घंटों तक शरीर में बना रह सकता है। ऐसे में रात को सोने से ठीक पहले चाय या कॉफी पीने से नींद आने में परेशानी हो सकती है।

अगर आप अच्छी नींद चाहते हैं तो दोपहर के बाद कैफीन का सेवन कम करें। खासतौर पर शाम और रात में कॉफी, तेज चाय और एनर्जी ड्रिंक्स से दूरी बनाना बेहतर हो सकता है।

5. बेडरूम का माहौल रखें शांत और आरामदायक

अच्छी नींद के लिए बेडरूम का वातावरण भी महत्वपूर्ण होता है। अगर कमरे में बहुत ज्यादा रोशनी, शोर या गर्मी है तो बार-बार नींद खुल सकती है।

इसलिए सोने के कमरे को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें। जरूरत पड़ने पर पर्दों, आई मास्क या ईयरप्लग का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसके अलावा बिस्तर और तकिया भी आरामदायक होना चाहिए, ताकि शरीर को पर्याप्त आराम मिल सके।

6. नियमित रूप से एक्सरसाइज करें

शारीरिक गतिविधियां शरीर को स्वस्थ रखने के साथ नींद की गुणवत्ता बेहतर करने में भी मदद कर सकती हैं। नियमित रूप से पैदल चलना, योग, साइकिलिंग या हल्की एक्सरसाइज करने से रात में अच्छी नींद आने में सहायता मिल सकती है।

हालांकि, सोने से ठीक पहले बहुत ज्यादा तेज एक्सरसाइज करने से कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है। इसलिए दिन में या शाम के शुरुआती समय में व्यायाम करना बेहतर विकल्प है।

7. सोने से पहले भारी भोजन करने से बचें

रात में बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना या भारी भोजन करने से कुछ लोगों को एसिडिटी, गैस और अपच की समस्या हो सकती है। इससे सोते समय असहजता महसूस होती है और नींद बार-बार टूट सकती है।

कोशिश करें कि सोने से लगभग 2 से 3 घंटे पहले रात का भोजन कर लें। रात में हल्का और संतुलित खाना खाएं। हालांकि, भूखे पेट सोना भी जरूरी नहीं है। जरूरत पड़ने पर हल्का स्नैक लिया जा सकता है।

8. सोने से पहले शराब और निकोटीन से बचें

कुछ लोगों को लगता है कि शराब पीने से जल्दी नींद आ जाती है, लेकिन वास्तव में शराब नींद की गुणवत्ता को खराब कर सकती है। इससे रात के दूसरे हिस्से में बार-बार नींद खुलने और गहरी नींद प्रभावित होने की आशंका रहती है।

इसी तरह निकोटीन भी उत्तेजक पदार्थ है, जो नींद आने में बाधा डाल सकता है। इसलिए बेहतर स्लीप क्वालिटी के लिए शराब और तंबाकू से दूरी बनाना फायदेमंद है।

9. सोने से पहले रिलैक्स करने की आदत डालें

अगर रात में बिस्तर पर जाने के बाद भी दिमाग में दिनभर की बातें चलती रहती हैं तो सोने से पहले कुछ समय खुद को शांत करने के लिए निकालें।

इसके लिए आप ये तरीके अपना सकते हैं:

  • हल्की सांस लेने वाली एक्सरसाइज करें।

  • कुछ मिनट मेडिटेशन करें।

  • हल्की और शांत धुन वाला संगीत सुनें।

  • किताब पढ़ें।

  • गुनगुने पानी से नहाएं।

  • अगले दिन के कामों की सूची पहले ही तैयार कर लें।

इन आदतों से मानसिक तनाव कम करने और सोने से पहले शरीर को आराम देने में मदद मिल सकती है।

10. सुबह उठकर प्राकृतिक रोशनी में समय बिताएं

सुबह की प्राकृतिक रोशनी शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी को नियमित रखने में मदद करती है। सुबह उठने के बाद कुछ समय बाहर रोशनी में बिताएं। आप सुबह की सैर भी कर सकते हैं।

दिन में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी मिलना और रात में रोशनी कम रखना शरीर के नींद-जागने के चक्र को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

उम्र के हिसाब से कितने घंटे सोना जरूरी है?

हर व्यक्ति की नींद की जरूरत उसकी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सामान्य तौर पर नेशनल स्लीप फाउंडेशन की सिफारिशों के अनुसार वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नींद उचित मानी जाती है।

उम्र रोजाना जरूरी नींद
नवजात (0-3 महीने) 14-17 घंटे
शिशु (4-11 महीने) 12-15 घंटे
छोटे बच्चे (1-2 साल) 11-14 घंटे
प्रीस्कूल (3-5 साल) 10-13 घंटे
स्कूली बच्चे (6-13 साल) 9-11 घंटे
किशोर (14-17 साल) 8-10 घंटे
वयस्क (18-64 साल) 7-9 घंटे
65 साल से अधिक 7-8 घंटे

ध्यान रखें कि ये सामान्य दिशानिर्देश हैं। किसी व्यक्ति की नींद की वास्तविक जरूरत उसकी स्वास्थ्य स्थिति और दिनचर्या के अनुसार अलग हो सकती है।

रात में बार-बार नींद खुलने के क्या कारण हो सकते हैं?

रात में बार-बार आंख खुलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं:

  1. मानसिक तनाव और चिंता।

  2. सोने-जागने का अनियमित समय।

  3. रात में ज्यादा चाय या कॉफी पीना।

  4. मोबाइल और टीवी का अधिक इस्तेमाल।

  5. कमरे में शोर या ज्यादा रोशनी।

  6. बार-बार पेशाब आने की समस्या।

  7. स्लीप एपनिया यानी नींद में सांस रुकने की समस्या।

  8. पैरों में बेचैनी महसूस होना।

  9. कुछ दवाओं का प्रभाव।

  10. दर्द या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं।

अगर नींद की समस्या लंबे समय से बनी हुई है तो इसके वास्तविक कारण का पता लगाना जरूरी है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर आपको कई हफ्तों से लगातार नींद आने में परेशानी हो रही है, रात में बार-बार आंख खुलती है या सुबह उठने के बाद भी थकान बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लें।

अगर तेज खर्राटे आते हैं, नींद में सांस रुकती है या दिन में अत्यधिक नींद आती है तो स्लीप एपनिया की जांच की जरूरत हो सकती है।

लंबे समय तक बनी रहने वाली अनिद्रा के लिए डॉक्टर कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी फॉर इंसोम्निया (CBT-I) की सलाह दे सकते हैं। यह अनिद्रा के इलाज का प्रभावी तरीका माना जाता है। बिना डॉक्टर की सलाह के नींद की गोलियां या सप्लीमेंट लेना शुरू न करें।

निष्कर्ष

अच्छी नींद केवल शरीर को आराम देने के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। अगर आपको रात में नींद नहीं आती या बार-बार आंख खुल जाती है तो सबसे पहले अपनी दिनचर्या में बदलाव करें। नियमित समय पर सोना, मोबाइल से दूरी बनाना, कैफीन कम करना, रोजाना एक्सरसाइज करना और बेडरूम को आरामदायक रखना जैसी छोटी-छोटी आदतें स्लीप क्वालिटी बेहतर करने में मदद कर सकती हैं।

हालांकि, अगर इन बदलावों के बावजूद नींद की समस्या बनी रहती है तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह किसी चिकित्सकीय सलाह या उपचार का विकल्प नहीं है।

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