संसदीय समिति के सवाल पर एयरलाइंस का जवाब- पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होना भी बड़ी वजह, ATF की कीमतों ने बढ़ाया खर्च ???

त्योहारों, छुट्टियों और शादी के सीजन में हवाई किराए में होने वाली बढ़ोतरी आम यात्रियों की परेशानी और बढ़ा देती है....

नई दिल्ली: देश में हवाई यात्रा करना लगातार महंगा होता जा रहा है। कई रूटों पर यात्रियों को फ्लाइट टिकट के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। त्योहारों, छुट्टियों और शादी के सीजन में हवाई किराए में होने वाली बढ़ोतरी आम यात्रियों की परेशानी और बढ़ा देती है। इसी मुद्दे को लेकर अब संसदीय समिति ने एयरलाइन कंपनियों से सवाल-जवाब किए हैं। समिति ने पूछा है कि आखिर भारत में हवाई टिकटों की कीमतें इतनी ज्यादा क्यों हो रही हैं और यात्रियों को राहत देने के लिए कंपनियां क्या कदम उठा रही हैं?

इस सवाल के जवाब में देश की प्रमुख एयरलाइन कंपनियों इंडिगो और एयर इंडिया के अधिकारियों ने विमानन ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतों और पाकिस्तान के एयरस्पेस पर लगे प्रतिबंधों को परिचालन खर्च बढ़ने की प्रमुख वजह बताया है। एयरलाइंस के मुताबिक, पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र इस्तेमाल नहीं कर पाने के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इससे विमान का ईंधन खर्च, उड़ान का समय और संचालन की लागत बढ़ जाती है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि एयरलाइंस ने पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंध को महंगे टिकटों की एक वजह बताया है, न कि एकमात्र वजह। ईंधन की कीमतें, रुपये की विनिमय दर, यात्रियों की मांग और उपलब्ध सीटों की संख्या भी हवाई किराए को प्रभावित करती हैं।

संसदीय समिति की बैठक में उठा महंगे हवाई टिकटों का मुद्दा

2 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में सार्वजनिक उपक्रमों संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक हुई। इस समिति की अध्यक्षता बीजेपी सांसद बैजयंत पांडा ने की। बैठक में इंडिगो और एयर इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाया गया था।

बैठक के दौरान समिति के कुछ सदस्यों ने देश में लगातार बढ़ रहे हवाई किराए को लेकर चिंता जताई। सदस्यों का सवाल था कि आम आदमी के लिए हवाई यात्रा पहले से ज्यादा महंगी क्यों होती जा रही है? क्या एयरलाइन कंपनियां परिचालन खर्च के नाम पर टिकटों की कीमतें लगातार बढ़ा रही हैं?

एयरलाइन प्रतिनिधियों ने अपने जवाब में बताया कि विमानन क्षेत्र को इस समय कई तरह की आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें विमानन ईंधन की बढ़ती कीमतें और पाकिस्तान के एयरस्पेस के बंद होने से बढ़ने वाला अतिरिक्त खर्च प्रमुख हैं।

बैठक में केवल टिकटों की कीमतों पर ही चर्चा नहीं हुई, बल्कि विमानन सुरक्षा और भारत में अंतरराष्ट्रीय स्तर की विमानन व्यवस्थाओं को अपनाने से जुड़े मुद्दों पर भी विचार किया गया।

DT Next+1

पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होने से कैसे बढ़ रहा है खर्च?

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बाद अप्रैल 2025 से भारतीय विमानों के लिए पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद है। इस प्रतिबंध का असर खासतौर पर उन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ा है, जो भारत से यूरोप, उत्तरी अमेरिका और मध्य एशिया की ओर जाती हैं।

पहले कुछ उड़ानें पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से होकर अपेक्षाकृत कम दूरी तय कर सकती थीं। लेकिन प्रतिबंध के बाद एयरलाइंस को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। कई मामलों में विमानों को लंबा चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है।

इसका सीधा असर एयरलाइन कंपनियों के खर्च पर पड़ता है।

  • ईंधन की खपत बढ़ना: विमान को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे ज्यादा ईंधन खर्च होता है।

  • उड़ान का समय बढ़ना: अतिरिक्त दूरी के कारण विमान को गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लगता है।

  • कर्मचारियों का खर्च: लंबी उड़ानों से पायलट और केबिन क्रू के ड्यूटी शेड्यूल पर भी असर पड़ सकता है।

  • विमान का इस्तेमाल: एक विमान को एक उड़ान पूरी करने में ज्यादा समय लगने से उसके अगले परिचालन कार्यक्रम पर असर पड़ता है।

  • ऑपरेशनल लागत: ईंधन, रखरखाव और अन्य संचालन संबंधी खर्च बढ़ सकते हैं।

इस तरह पाकिस्तान के एयरस्पेस पर प्रतिबंध का असर केवल उड़ान की दूरी तक सीमित नहीं है, बल्कि एयरलाइन कंपनियों की पूरी परिचालन व्यवस्था पर पड़ता है।

Business Upturn+2

ATF की बढ़ती कीमतें भी एयरलाइंस के लिए बड़ी चुनौती

हवाई टिकट महंगे होने के पीछे दूसरी बड़ी वजह एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमतें हैं। ATF वह विशेष ईंधन है, जिसका इस्तेमाल विमानों को उड़ाने के लिए किया जाता है। किसी भी एयरलाइन कंपनी के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी काफी ज्यादा होती है।

सरकारी जानकारी के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में ATF एयरलाइन के परिचालन खर्च का करीब 40 प्रतिशत होता है। ईंधन की कीमतों में तेजी आने पर कंपनियों का खर्च तेजी से बढ़ जाता है।

जब विमानन ईंधन महंगा होता है तो एयरलाइंस के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं। उन्हें विमानों के संचालन, कर्मचारियों, रखरखाव और अन्य खर्चों के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में ईंधन की कीमतों का असर और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

ऐसे में कंपनियां अपनी लागत को नियंत्रित करने के लिए टिकटों की कीमतों में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि, टिकट का अंतिम किराया केवल ईंधन की कीमतों से तय नहीं होता, बल्कि बाजार की मांग और उपलब्ध सीटों पर भी निर्भर करता है।

Press Information Bureau+2

इंडिगो को हुआ 1,879 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनियों में शामिल इंडिगो भी बढ़ती परिचालन लागत के दबाव का सामना कर रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी को सितंबर तिमाही में 1,879.1 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।

इस घाटे के पीछे विमानन ईंधन की ऊंची कीमतों और रुपये में गिरावट को प्रमुख कारण बताया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से एयरलाइन कंपनियों के खर्च पर असर पड़ता है।

वहीं, एयर इंडिया की वित्तीय स्थिति पर भी दबाव देखने को मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में एयर इंडिया का घाटा लगभग दोगुना हो गया।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय विमानन उद्योग के सामने केवल यात्रियों की मांग पूरी करने की चुनौती नहीं है, बल्कि बढ़ते खर्च और वित्तीय दबाव को संभालना भी बड़ी समस्या बन गया है।

Moneycontrol+1

क्या भारत में सरकार हवाई टिकटों का किराया तय करती है?

आम यात्रियों के मन में एक बड़ा सवाल यह भी रहता है कि जब हवाई टिकटों की कीमतें इतनी ज्यादा बढ़ जाती हैं तो सरकार इन्हें नियंत्रित क्यों नहीं करती?

दरअसल, भारत में सामान्य परिस्थितियों में हवाई किराए बाजार आधारित व्यवस्था के तहत तय किए जाते हैं। एयरलाइन कंपनियों को परिचालन खर्च, यात्रियों की मांग, उपलब्ध सीटों और अन्य बाजार परिस्थितियों के आधार पर किराया निर्धारित करने की स्वतंत्रता होती है।

हवाई टिकटों की कीमतें कई स्तरों पर तय होती हैं। किसी फ्लाइट में शुरुआती कम कीमत वाली सीटें बिक जाने के बाद अगली उपलब्ध सीटें अधिक कीमत पर मिल सकती हैं। इसी वजह से एक ही विमान में सफर करने वाले दो यात्रियों ने एक ही दिन टिकट बुक किया हो, फिर भी उनके टिकटों की कीमत अलग-अलग हो सकती है।

उदाहरण के तौर पर, अगर दिल्ली से मुंबई जाने वाली किसी फ्लाइट में कम कीमत वाले टिकट जल्दी बिक जाते हैं और यात्रियों की मांग लगातार बनी रहती है, तो बाकी सीटों के किराए बढ़ सकते हैं।

इसके अलावा त्योहारों, गर्मियों की छुट्टियों, वीकेंड और शादी के सीजन में टिकटों की मांग बढ़ने पर किराए में तेजी देखने को मिलती है।

Digital Sansad+2

सरकार ने हवाई किराए को लेकर नए नियम भी अधिसूचित किए

महंगे हवाई टिकटों के बीच केंद्र सरकार ने विमान किराए से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। 2 नवंबर 2026 को अधिसूचित नए प्रावधानों के मुताबिक, सरकार सामान्य परिस्थितियों में हवाई किराए को नियंत्रित नहीं करेगी, लेकिन असाधारण परिस्थितियों में जनहित को देखते हुए हस्तक्षेप कर सकेगी।

ये प्रावधान भारतीय वायुयान नियम, 2026 के तहत लाए गए हैं और 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

नए नियमों के अनुसार:

  1. एयरलाइन कंपनियों को परिचालन खर्च सहित विभिन्न कारकों के आधार पर किराया निर्धारित करना होगा।

  2. कंपनियों को निर्धारित प्रारूप और समय-समय पर अपने किराए का विवरण DGCA को देना होगा।

  3. टिकटों की कीमतों को अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करना होगा।

  4. असाधारण परिस्थितियों में सरकार जनहित को ध्यान में रखते हुए हस्तक्षेप कर सकेगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य हवाई किराए में पारदर्शिता बढ़ाना और यात्रियों को टिकटों की कीमतों की बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार हर फ्लाइट का किराया तय करेगी या सभी टिकटों पर अधिकतम मूल्य सीमा लागू होगी।

The Tribune+1

पहले भी महंगे हवाई किराए पर सवाल उठा चुकी है संसदीय समिति

हवाई किराए में अचानक होने वाली बढ़ोतरी का मुद्दा नया नहीं है। फरवरी 2024 में भी संसदीय समिति ने एयरलाइन कंपनियों द्वारा खुद ही किराए नियंत्रित करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।

उस समय समिति ने सुझाव दिया था कि अलग-अलग रूट के हिसाब से हवाई किराए की अधिकतम सीमा तय करने की संभावना पर विचार किया जाना चाहिए। समिति का मानना था कि त्योहारों और छुट्टियों के दौरान टिकटों की कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी यात्रियों के हितों के खिलाफ हो सकती है।

समिति ने DGCA को हवाई किराए के नियमन के लिए अधिक अधिकार देने और इस संबंध में अलग व्यवस्था बनाने की जरूरत भी बताई थी।

India News – The Indian Express

आम यात्रियों को कब मिलेगी महंगे टिकटों से राहत?

हवाई यात्रा आज केवल बड़े कारोबारियों और संपन्न लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। नौकरी, पढ़ाई, व्यापार, चिकित्सा और पारिवारिक जरूरतों के लिए भी बड़ी संख्या में लोग विमान से सफर करते हैं।

ऐसे में टिकटों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आम यात्रियों के बजट को प्रभावित करती है। एयरलाइंस की ओर से पाकिस्तान के एयरस्पेस प्रतिबंध और ATF की बढ़ती कीमतों को वजह बताना अपनी जगह सही हो सकता है, लेकिन यात्रियों के लिए जरूरी है कि टिकटों की कीमतें पारदर्शी हों और कंपनियां उचित किराया वसूलें।

अब देखना होगा कि सरकार की नई नियमावली और संसदीय समिति की पूछताछ के बाद विमानन कंपनियां अपनी किराया नीति में क्या बदलाव करती हैं। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि DGCA और नागरिक उड्डयन मंत्रालय महंगे हवाई टिकटों पर नियंत्रण और यात्रियों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाते हैं।

फिलहाल इतना साफ है कि हवाई टिकट महंगे होने के पीछे केवल पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद होना जिम्मेदार नहीं है। विमानन ईंधन की कीमतें, रुपये की कमजोरी, सीटों की उपलब्धता और यात्रियों की मांग भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।

Back to top button