NAFLD Symptoms: फैटी लिवर की समस्या आजकल काफी आम हो रही है। खास बात यह है कि शुरुआती दौर में ज्यादातर लोगों को इसके कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते???

NAFLD Symptoms: फैटी लिवर के ये लक्षण न करें नजरअंदाज, ऐसे पता चलेगा Liver Damage....

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नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के क्या लक्षण होते हैं? जानिए कैसे पता चलेगा Liver Damage हो रहा है

 कई बार रूटीन ब्लड टेस्ट या पेट के अल्ट्रासाउंड के दौरान इसका पता चलता है। लंबे समय तक फैटी लिवर रहने पर कुछ लोगों में सूजन और लिवर की क्षति बढ़कर फाइब्रोसिस या सिरोसिस तक पहुंच सकती है।

नोट: मेडिकल संदर्भ में NAFLD का नया नाम MASLD (Metabolic Dysfunction-Associated Steatotic Liver Disease) है। इसी तरह NASH को अब MASH कहा जाता है।

क्या होता है नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर?

जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है तो इसे फैटी लिवर कहा जाता है। पहले ऐसी स्थिति को, जब शराब प्रमुख कारण न हो, Non-Alcoholic Fatty Liver Disease यानी NAFLD कहा जाता था।

अब मेडिकल गाइडलाइंस में इसके लिए MASLD शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें लिवर में फैट जमा होने के साथ मोटापा, डायबिटीज, प्री-डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल जैसी मेटाबॉलिक समस्याएं भूमिका निभा सकती हैं।

सबसे बड़ी समस्या—शुरुआत में पता ही नहीं चलता

फैटी लिवर की शुरुआती अवस्था में व्यक्ति सामान्य महसूस कर सकता है। कई मरीजों में कोई खास लक्षण नहीं होता। ऐसे मामलों में बीमारी का पता संयोग से तब चलता है जब किसी दूसरी वजह से Liver Function Test या पेट का Ultrasound कराया जाता है।

यही कारण है कि केवल शरीर में कोई लक्षण दिखाई देने का इंतजार करना सही तरीका नहीं है।

फैटी लिवर के संभावित लक्षण क्या हैं?

हालांकि शुरुआती फैटी लिवर अक्सर बिना लक्षण के रहता है, कुछ लोगों में निम्न परेशानियां दिखाई दे सकती हैं:

  • लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना
  • शरीर में सुस्ती रहना
  • पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में असहजता या भारीपन
  • कुछ मामलों में पेट दर्द या बेचैनी
  • बीमारी बढ़ने पर भूख में कमी
  • उन्नत लिवर बीमारी में त्वचा या आंखों का पीला पड़ना
  • पैरों या पेट में सूजन
  • आसानी से चोट लगना या खून आने की प्रवृत्ति
  • गंभीर अवस्था में भ्रम या अत्यधिक नींद जैसी समस्याएं

हालांकि इनमें से कई लक्षण दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर फैटी लिवर या लिवर डैमेज की पुष्टि नहीं की जा सकती।

कैसे पता चलेगा कि Liver Damage हो रहा है?

सिर्फ लक्षण देखकर यह पता लगाना मुश्किल है कि लिवर में कितना नुकसान हो चुका है। डॉक्टर आमतौर पर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, ब्लड टेस्ट और इमेजिंग की मदद लेते हैं।

Liver Function Tests (LFT) में ALT और AST जैसे एंजाइम देखे जा सकते हैं। लेकिन एक जरूरी बात यह है कि लिवर एंजाइम सामान्य होने पर भी फैटी लिवर या महत्वपूर्ण बीमारी को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

Ultrasound से भी मिल सकती है जानकारी

पेट का अल्ट्रासाउंड लिवर में जमा फैट का पता लगाने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली जांचों में से एक है। जरूरत के अनुसार डॉक्टर FibroScan या दूसरी इमेजिंग जांच की सलाह भी दे सकते हैं।

FibroScan जैसी तकनीक लिवर में मौजूद फैट और फाइब्रोसिस के आकलन में मदद कर सकती है।

FIB-4 टेस्ट क्या है?

लिवर में फैट होना और लिवर में गंभीर फाइब्रोसिस होना एक ही बात नहीं है। डॉक्टर यह जानना चाहते हैं कि कहीं बीमारी आगे बढ़कर लिवर में स्कारिंग तो नहीं कर रही।

इसके लिए FIB-4 जैसे नॉन-इनवेसिव स्कोर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें उम्र, AST, ALT और प्लेटलेट काउंट जैसी जानकारी का इस्तेमाल होता है।

AASLD के अनुसार FIB-4 कम जोखिम वाले मरीजों की पहचान में मदद कर सकता है, जबकि ज्यादा स्कोर आने पर FibroScan/VCTE या अन्य जांच से आगे मूल्यांकन किया जा सकता है।

फैटी लिवर कब गंभीर हो सकता है?

हर फैटी लिवर मरीज में गंभीर लिवर डैमेज नहीं होता। लेकिन कुछ लोगों में लिवर में फैट के साथ सूजन और कोशिकाओं को नुकसान होने लगता है। इसे पहले NASH कहा जाता था, जिसका नया नाम MASH है।

समय के साथ कुछ मरीजों में फाइब्रोसिस बढ़ सकता है और गंभीर मामलों में सिरोसिस विकसित हो सकता है। इसलिए फैटी लिवर की रिपोर्ट आने के बाद यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि लिवर में केवल फैट जमा है या फाइब्रोसिस भी मौजूद है।

फैटी लिवर को कम करने के लिए क्या करें?

फैटी लिवर के प्रबंधन में Lifestyle Modification की अहम भूमिका है। अगर किसी व्यक्ति का वजन अधिक है तो डॉक्टर की निगरानी में धीरे-धीरे वजन कम करना फायदेमंद हो सकता है।

AASLD के अनुसार लगभग 5-10 प्रतिशत वजन कम करने से लिवर में फैट, सूजन और फाइब्रोसिस में सुधार हो सकता है।

इसके साथ:

  • नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
  • ज्यादा कैलोरी और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन कम करें।
  • मीठे पेय और अतिरिक्त चीनी का सेवन सीमित करें।
  • सब्जियों, साबुत अनाज और संतुलित आहार को प्राथमिकता दें।
  • डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के हर्बल या सप्लीमेंट्स का सेवन न करें।

क्या सिर्फ शराब न पीने से फैटी लिवर नहीं होगा?

नहीं। यही वजह है कि NAFLD/MASLD को केवल शराब से जोड़कर देखना सही नहीं है। मेटाबॉलिक समस्याएं जैसे मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज और लिपिड असामान्यताएं फैटी लिवर के जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं।

कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति को पहले से फैटी लिवर की समस्या है और उसके साथ आंख या त्वचा पीली होना, पेट या पैरों में अचानक सूजन, असामान्य रक्तस्राव, बहुत ज्यादा कमजोरी, उलझन/भ्रम या चेतना में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दें तो जल्द चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।

निष्कर्ष

फैटी लिवर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआत में यह अक्सर चुपचाप रहता है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर लिवर की स्थिति का अंदाजा लगाना सही नहीं है। जरूरत पड़ने पर LFT, अल्ट्रासाउंड और FIB-4 जैसे नॉन-इनवेसिव आकलन के जरिए जोखिम का पता लगाया जा सकता है और जरूरत होने पर FibroScan या अन्य जांच की जाती है।

अगर रिपोर्ट में फैटी लिवर आया है तो घबराने के बजाय डॉक्टर से यह समझना जरूरी है कि बीमारी किस स्तर पर है और क्या लिवर में फाइब्रोसिस का जोखिम है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है, किसी व्यक्ति के लिए निदान या व्यक्तिगत उपचार की सलाह नहीं। लिवर की जांच रिपोर्ट या लक्षण होने पर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट/हेपेटोलॉजिस्ट से सलाह लें।

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