Diabetes Effect on Kidney: पेशाब में बार-बार या लगातार झाग दिखाई देना हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति में इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए???
टॉयलेट सीट पर दिख रहा है पेशाब का झाग? डायबिटीज का मरीज इसे न समझे आम बात, किडनी से लीक हो रहा हो सकता है प्रोटीन...
यह पेशाब में प्रोटीन यानी एल्ब्यूमिन आने का संकेत हो सकता है, जो किडनी की फिल्टरिंग क्षमता प्रभावित होने की शुरुआती निशानियों में शामिल है।
नई दिल्ली।
डायबिटीज सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं है। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर शरीर के कई अंग प्रभावित हो सकते हैं और किडनी भी उनमें शामिल है। किडनी का मुख्य काम खून से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी को फिल्टर करके पेशाब के रास्ते बाहर निकालना है। स्वस्थ किडनी आमतौर पर खून के जरूरी प्रोटीन, खासकर एल्ब्यूमिन, को पेशाब में जाने से रोकती है।
जब किडनी के फिल्टर यानी ग्लोमेरुली को नुकसान पहुंचता है तो एल्ब्यूमिन पेशाब में आने लग सकता है। इसे एल्ब्यूमिन्यूरिया या प्रोटीन्यूरिया कहा जाता है। NIDDK के अनुसार, डायबिटीज किडनी की बीमारी का प्रमुख कारण है और डायबिटीज से पीड़ित लोगों में किडनी की बीमारी विकसित हो सकती है।
पेशाब में झाग क्यों बनता है?
पेशाब में झाग बनने के कई कारण हो सकते हैं और केवल झाग देखकर किडनी की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन अगर झाग बार-बार या लगातार दिखाई देता है और खासकर व्यक्ति को डायबिटीज है, तो इसकी जांच कराना जरूरी हो सकता है।
जब पेशाब में प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है, तो पेशाब में बुलबुले या झाग दिखाई दे सकते हैं। NIDDK के अनुसार, प्रोटीन्यूरिया के कारण पेशाब में झाग दिखाई देना ग्लोमेरुलर बीमारी का एक संभावित लक्षण हो सकता है।
National Kidney Foundation भी फोमी यूरिन को एल्ब्यूमिन्यूरिया के संभावित लक्षणों में शामिल करता है। हालांकि, कई लोगों में शुरुआती किडनी बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।
डायबिटीज किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाती है?
लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर अधिक रहने से किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं और फिल्टरिंग सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है। इसके परिणामस्वरूप किडनी खून को ठीक तरह से फिल्टर करने में कमजोर होने लगती है और एल्ब्यूमिन जैसे प्रोटीन पेशाब में पहुंच सकते हैं।
डायबिटीज के साथ हाई ब्लड प्रेशर होने पर किडनी को नुकसान का खतरा और बढ़ सकता है। NIDDK के अनुसार, ज्यादा ब्लड ग्लूकोज और ज्यादा ब्लड प्रेशर दोनों डायबिटिक किडनी डिजीज के महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
क्या हर बार झागदार पेशाब किडनी की बीमारी है?
नहीं। पेशाब में झाग दिखना अपने आप में किडनी की बीमारी का पक्का प्रमाण नहीं है। कभी-कभी पेशाब के तेज प्रवाह या अन्य अस्थायी कारणों से भी बुलबुले दिखाई दे सकते हैं।
लेकिन यदि झाग लगातार बना रहता है, बार-बार दिखाई देता है या इसके साथ शरीर में सूजन, बार-बार पेशाब आना, ब्लड प्रेशर बढ़ना या अन्य लक्षण नजर आते हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना उचित है। एल्ब्यूमिन्यूरिया की पुष्टि केवल पेशाब और जरूरत पड़ने पर खून की जांच से की जा सकती है।
इन लक्षणों को भी न करें नजरअंदाज
अगर डायबिटीज के मरीज को पेशाब में झाग के साथ निम्न समस्याएं दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए—
- पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
- आंखों के आसपास खासकर सुबह के समय सूजन
- बार-बार या रात में ज्यादा पेशाब आना
- ब्लड प्रेशर बढ़ना
- असामान्य थकान
- पेशाब में खून दिखाई देना
- शरीर में पानी जमा होने के कारण वजन बढ़ना
हालांकि, शुरुआती डायबिटिक किडनी डिजीज में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर किडनी की स्थिति का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
डायबिटीज के मरीज कौन सी जांच कराएं?
डायबिटीज से पीड़ित लोगों में किडनी की नियमित जांच महत्वपूर्ण है। डॉक्टर आमतौर पर दो प्रमुख चीजों पर ध्यान देते हैं।
1. Urine Albumin-to-Creatinine Ratio यानी UACR
यह पेशाब की जांच है, जिससे पेशाब में एल्ब्यूमिन की मात्रा का पता लगाया जाता है। NIDDK के अनुसार, UACR 30 mg/g से अधिक होना सामान्य से ज्यादा माना जाता है और यह किडनी की बीमारी का मार्कर हो सकता है।
2. Serum Creatinine और eGFR
खून की जांच से क्रिएटिनिन मापा जाता है और इसके आधार पर eGFR का अनुमान लगाया जाता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है।
NIDDK के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों और लंबे समय से टाइप-1 डायबिटीज वाले लोगों में नियमित रूप से किडनी की जांच की जानी चाहिए।
किडनी को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
डायबिटीज से जुड़ी किडनी बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को डॉक्टर द्वारा बताए गए लक्ष्य के अनुसार नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा—
- डॉक्टर द्वारा बताई गई डायबिटीज की दवाएं नियमित लें।
- ब्लड शुगर की नियमित निगरानी करें।
- ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखें।
- नमक का सेवन सीमित रखने के बारे में डॉक्टर की सलाह लें।
- नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
- धूम्रपान से बचें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं या सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल न करें।
- समय-समय पर UACR और kidney function की जांच कराएं।
NIDDK के अनुसार, ब्लड ग्लूकोज और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना डायबिटिक किडनी डिजीज को धीमा करने या रोकने में मदद कर सकता है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर पेशाब में लगातार झाग के साथ पैरों या चेहरे पर तेजी से सूजन, पेशाब में खून, सांस फूलना, बहुत कम पेशाब आना या गंभीर कमजोरी जैसी समस्या हो, तो चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।
ध्यान रखें कि पेशाब में झाग दिखने का मतलब सीधे किडनी फेलियर नहीं होता। शुरुआती चरण में किडनी की समस्या का पता चलने पर निगरानी और उपचार से बीमारी के बढ़ने के जोखिम को कम किया जा सकता है। National Kidney Foundation के अनुसार, किडनी की बीमारी और डायबिटीज होने का मतलब यह नहीं है कि किडनी निश्चित रूप से फेल होगी; शुरुआती पहचान और उपचार महत्वपूर्ण हैं।
जरूरी सलाह
यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। पेशाब में लगातार झाग दिखाई देने पर खासकर डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर वाले व्यक्ति को डॉक्टर से सलाह लेकर UACR, क्रिएटिनिन/eGFR और ब्लड प्रेशर जैसी जांचों के बारे में पूछना चाहिए। केवल पेशाब देखकर खुद से किडनी की बीमारी का निदान न करें।






