भारत में NEET, पाकिस्तान में डॉक्टर बनने के लिए कौन सा एग्जाम? जानिए पूरी प्रक्रिया और कितने छात्र होते हैं पास
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भारत में डॉक्टर बनने के लिए छात्रों को NEET-UG परीक्षा पास करनी होती है। हाल के वर्षों में NEET को लेकर सुरक्षा, पारदर्शिता और पेपर लीक जैसे मुद्दे चर्चा में रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पड़ोसी देश Pakistan में डॉक्टर बनने की प्रक्रिया भी काफी कठिन है और वहां भी छात्रों को कई चरणों से गुजरना पड़ता है?
पाकिस्तान में कौन सा एंट्रेंस एग्जाम होता है?
पाकिस्तान में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए मुख्य परीक्षा को MDCAT (Medical and Dental College Admission Test) कहा जाता है। यह परीक्षा Pakistan Medical and Dental Council के दिशा-निर्देशों के तहत आयोजित की जाती है।
MDCAT में जीव विज्ञान (Biology), रसायन विज्ञान (Chemistry), भौतिक विज्ञान (Physics), अंग्रेजी और तार्किक क्षमता (Logical Reasoning) से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। इस परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में दाखिला मिलता है।
भारत के NEET और पाकिस्तान के MDCAT में क्या अंतर है?
| बिंदु | भारत | पाकिस्तान |
|---|---|---|
| प्रवेश परीक्षा | NEET-UG | MDCAT |
| नियामक संस्था | National Testing Agency | Pakistan Medical and Dental Council |
| कोर्स | MBBS, BDS | MBBS, BDS |
| प्रवेश प्रक्रिया | NEET स्कोर + काउंसलिंग | MDCAT स्कोर + मेरिट |
केवल दाखिला लेना ही काफी नहीं
पाकिस्तान में मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलने के बाद छात्रों को लगभग 5 वर्ष का MBBS कोर्स पूरा करना होता है। इसके बाद एक साल की हाउस जॉब (इंटर्नशिप) करनी पड़ती है।
इसके बाद भी डॉक्टर के रूप में पूर्ण पंजीकरण (Registration) और आगे की विशेषज्ञता के लिए अतिरिक्त परीक्षाओं और प्रशिक्षण से गुजरना पड़ सकता है।
कितने छात्र होते हैं पास?
हर साल पाकिस्तान में लाखों छात्र MDCAT परीक्षा में शामिल होते हैं। हालांकि सीटों की संख्या सीमित होने के कारण केवल एक हिस्सा ही सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पा पाता है।
सफलता दर वर्ष और प्रांत के अनुसार बदलती रहती है, लेकिन आमतौर पर:
- परीक्षा में बड़ी संख्या में छात्र क्वालिफाई कर जाते हैं।
- मेडिकल कॉलेजों में सीटें सीमित होने के कारण मेरिट बहुत ऊंची रहती है।
- सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने वाले छात्रों का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहता है।
डॉक्टर बनने का सफर आसान नहीं
भारत हो या पाकिस्तान, डॉक्टर बनने का रास्ता बेहद प्रतिस्पर्धी और कठिन माना जाता है। दोनों देशों में छात्रों को:
- कठिन प्रवेश परीक्षा पास करनी होती है।
- कई वर्षों की मेडिकल पढ़ाई पूरी करनी होती है।
- इंटर्नशिप और प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है।
- लगातार मूल्यांकन और परीक्षाओं का सामना करना पड़ता है।
भारत में जहां डॉक्टर बनने का पहला कदम NEET-UG है, वहीं पाकिस्तान में छात्रों को MDCAT परीक्षा पास करनी होती है। दोनों देशों में मेडिकल शिक्षा अत्यधिक प्रतिस्पर्धी है और केवल प्रवेश परीक्षा पास कर लेना ही पर्याप्त नहीं होता। डॉक्टर बनने के लिए वर्षों की पढ़ाई, प्रशिक्षण और समर्पण की आवश्यकता होती है।
निष्कर्ष






