BRICS Summit 2026:-11 से 13 सितंबर तक दिल्ली में हाई अलर्ट, 12-13 सितंबर को भारत मंडपम में जुटेंगे BRICS नेता???
तीन दिन का पूरा लेखा-जोखा, 72 घंटे में क्या-क्या होगा? जानिए कार्यक्रम की पूरी लिस्ट...
नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाले इस सम्मेलन में BRICS के सदस्य देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई बड़े वैश्विक नेताओं की मौजूदगी के कारण पूरी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा किया गया है।
हालांकि मुख्य शिखर सम्मेलन दो दिनों का है, लेकिन राजधानी में इसकी तैयारियां और VVIP मूवमेंट 11 सितंबर से ही शुरू हो गई हैं। यानी आम लोगों के लिहाज से 11, 12 और 13 सितंबर—ये तीन दिन दिल्ली के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।
BRICS के विस्तार के बाद इस संगठन का वैश्विक प्रभाव पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। इस बार बैठक में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक शासन व्यवस्था, बहुपक्षवाद, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, तकनीक तथा मौजूदा अंतरराष्ट्रीय संकटों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
11 सितंबर: दिल्ली में शुरू होगा हाई-सिक्योरिटी मोड
11 सितंबर को BRICS नेताओं और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के दिल्ली पहुंचने के साथ राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था अपने चरम पर रहेगी। भारत मंडपम के आसपास के इलाकों के अलावा एयरपोर्ट से लेकर VVIP रूट तक सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन पर विशेष नजर रहेगी।
विदेशी मेहमानों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक को नियंत्रित और डायवर्ट किया जाएगा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 11 से 13 सितंबर के लिए विशेष ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है और यात्रियों को यात्रा के लिए अतिरिक्त समय रखने की सलाह दी गई है।
इस दौरान VVIP काफिलों की आवाजाही के समय कुछ रास्तों पर अस्थायी रोक या डायवर्जन देखने को मिल सकता है। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी अपनी यात्रा पहले से प्लान करने की सलाह दी गई है।
दिल्ली में BRICS सम्मेलन के दौरान 22 प्रमुख डायवर्जन पॉइंट बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। कई प्रमुख सड़कों पर नियंत्रित यातायात व्यवस्था लागू रहेगी।
12 सितंबर: BRICS Summit का पहला बड़ा दिन
12 सितंबर को भारत मंडपम में BRICS नेताओं का मुख्य कार्यक्रम शुरू होगा। अलग-अलग सदस्य देशों के नेता और प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन स्थल पर पहुंचेंगे।
पहला सत्र—वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद
पहले दिन की प्रमुख चर्चाओं में Inclusive Global Governance and Strengthening Multilateralism यानी समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर जोर रहेगा।
भारत BRICS के मंच से वैश्विक संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की अधिक प्रभावी भागीदारी का मुद्दा उठा सकता है।
BRICS देशों के बीच यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया व्यापार तनाव, युद्ध, ऊर्जा संकट और बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का सामना कर रही है।
नेताओं की द्विपक्षीय बैठकें भी अहम
BRICS के मुख्य कार्यक्रम के अलावा सदस्य देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकातें भी इस सम्मेलन का बड़ा आकर्षण रहेंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत अन्य नेताओं के साथ बातचीत पर विशेष नजर रहेगी।
इन बैठकों में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, ऊर्जा, सुरक्षा, तकनीक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
PM मोदी देंगे विशेष डिनर
12 सितंबर के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से BRICS नेताओं के लिए विशेष रात्रिभोज भी प्रस्तावित है।
यह डिनर केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि नेताओं को अनौपचारिक माहौल में बातचीत का अवसर भी देगा। भारत इस दौरान अपनी सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं को भी विदेशी मेहमानों के सामने प्रदर्शित कर सकता है।
सम्मेलन के दौरान ग्रुप फोटो और अन्य औपचारिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने हैं।
13 सितंबर: दूसरे दिन होगी अहम नीतिगत चर्चा
13 सितंबर को BRICS सम्मेलन का दूसरा और अंतिम मुख्य दिन होगा। इस दिन नेताओं के बीच विभिन्न वैश्विक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा आगे बढ़ेगी।
व्यापार और निवेश पर फोकस
BRICS देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना इस सम्मेलन का महत्वपूर्ण एजेंडा रहेगा।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में सप्लाई चेन को मजबूत करना, व्यापार को आसान बनाना और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वित्तीय सहयोग जैसे विषय भी लंबे समय से चर्चा का हिस्सा रहे हैं।
खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा
दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। ऐसे में BRICS देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
इसके अलावा खाद्य सुरक्षा, कृषि सहयोग और वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
भारत अपने अनुभवों के आधार पर विकासशील देशों के लिए टिकाऊ और सुरक्षित खाद्य एवं ऊर्जा व्यवस्था का मुद्दा उठा सकता है।
टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सहयोग पर भी नजर
BRICS के एजेंडे में तकनीकी सहयोग तेजी से महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
सम्मेलन में डिजिटल अर्थव्यवस्था, नई तकनीक, स्टार्टअप और नवाचार से जुड़े सहयोग पर चर्चा हो सकती है। BRICS देशों के बीच स्टार्टअप नेटवर्क और इनोवेशन सहयोग को मजबूत करने से संबंधित प्रस्ताव भी चर्चा में हैं।
इससे सदस्य देशों के युवा उद्यमियों, टेक कंपनियों और इनोवेशन इकोसिस्टम को एक-दूसरे से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
BRICS के विस्तार के बाद बढ़ी संगठन की ताकत
BRICS अब पहले के पांच देशों के समूह तक सीमित नहीं है। पिछले वर्षों में संगठन का विस्तार हुआ है और इसमें मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हुए हैं।
इसके अलावा कई देशों को BRICS पार्टनर का दर्जा दिया गया है।
इस विस्तार के कारण BRICS की आबादी, आर्थिक क्षमता और वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी काफी बढ़ी है। अब यह संगठन केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और बहुपक्षीय व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट पर भी नजर
इस बार BRICS Summit ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ईरान से जुड़े घटनाक्रम, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर असर जैसे मुद्दे BRICS नेताओं की बातचीत में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध भी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में BRICS देशों के बीच किसी साझा रुख को लेकर दुनिया की नजर सम्मेलन पर रहेगी।
13 सितंबर को जारी हो सकता है New Delhi Declaration
सम्मेलन के अंत में सदस्य देशों की ओर से संयुक्त दस्तावेज या New Delhi Declaration जारी किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस घोषणा में BRICS देशों की साझा प्राथमिकताओं, वैश्विक शासन, आर्थिक सहयोग, बहुपक्षवाद और अन्य मुद्दों पर सहमति का खाका सामने आ सकता है।
हालांकि किसी भी संयुक्त घोषणा की भाषा सदस्य देशों के बीच अंतिम सहमति पर निर्भर करेगी।
दिल्ली में 72 घंटे क्यों रहेंगे खास?
अगर पूरे कार्यक्रम को आसान भाषा में समझें तो:
11 सितंबर
- विदेशी नेताओं और प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही
- VVIP सुरक्षा व्यवस्था
- दिल्ली में ट्रैफिक डायवर्जन
- एयरपोर्ट और प्रमुख VVIP रूट पर विशेष सुरक्षा
- भारत मंडपम और आसपास के क्षेत्रों में हाई सिक्योरिटी
12 सितंबर
- BRICS नेताओं का भारत मंडपम पहुंचना
- स्वागत और औपचारिक कार्यक्रम
- वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद पर प्रमुख सत्र
- नेताओं की द्विपक्षीय बैठकें
- ग्रुप फोटो
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से विशेष डिनर
13 सितंबर
- दूसरे दिन के प्रमुख सत्र
- व्यापार और निवेश पर चर्चा
- ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा
- तकनीक और नवाचार
- वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दे
- द्विपक्षीय बैठकें
- संयुक्त घोषणा/न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन की दिशा में अंतिम चर्चा
- सम्मेलन का समापन
आम लोगों के लिए क्या बदलेगा?
BRICS Summit के कारण दिल्ली में आम लोगों को सबसे ज्यादा असर ट्रैफिक व्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने 11 से 13 सितंबर के दौरान कई इलाकों में नियंत्रित यातायात व्यवस्था की जानकारी दी है। VVIP मूवमेंट के समय अचानक कुछ रास्तों पर ट्रैफिक रोका या डायवर्ट किया जा सकता है।
एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को सामान्य से अधिक समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है। दिल्ली-NCR से आने-जाने वाले लोगों के लिए मेट्रो को अपेक्षाकृत सुविधाजनक विकल्प माना जा रहा है।
नोएडा से दिल्ली जाने वाले मालवाहक वाहनों पर भी BRICS Summit के दौरान प्रतिबंध लगाए गए हैं। चिल्ला, DND और कालिंदी कुंज बॉर्डर से दिल्ली जाने वाले कई मालवाहक वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर डायवर्ट किया जा रहा है।
सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम
BRICS Summit में दुनिया के कई बड़े नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए दिल्ली में बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
भारत मंडपम के आसपास विशेष सुरक्षा घेरा रहेगा। विदेशी नेताओं के रूट, होटल, सम्मेलन स्थल और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती बढ़ाई गई है।
सुरक्षा के साथ-साथ ट्रैफिक पुलिस, स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय पर भी विशेष जोर दिया गया है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है BRICS Summit?
भारत के लिए यह सम्मेलन केवल एक अंतरराष्ट्रीय बैठक नहीं बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी प्राथमिकताओं को सामने रखने का बड़ा अवसर है।
2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन भारत को विकासशील देशों की आवाज, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार, आर्थिक सहयोग और वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का अवसर देता है।
भारत की कोशिश BRICS को ऐसा मंच बनाने की हो सकती है जहां अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक हितों वाले देश साझा मुद्दों पर सहयोग का रास्ता निकाल सकें।
निष्कर्ष
18वां BRICS Summit 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में होने जा रहा है, लेकिन इसकी गतिविधियों का असर 11 सितंबर से ही राजधानी में दिखाई देने लगेगा।
एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन और अन्य वैश्विक नेताओं की मुलाकातों पर दुनिया की नजर रहेगी, तो दूसरी तरफ व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, तकनीक और वैश्विक शासन जैसे मुद्दों पर होने वाली चर्चा सम्मेलन की दिशा तय करेगी।
13 सितंबर को होने वाला समापन और संभावित New Delhi Declaration यह बताएगा कि BRICS देश मौजूदा वैश्विक चुनौतियों पर कितनी साझा सहमति बना पाते हैं। ऐसे में अगले 72 घंटे भारत की कूटनीति और BRICS के भविष्य दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।





