UNGA 81 में OneSCD ग्लोबल पार्टनरशिप लॉन्च, सिकल सेल केयर को बेहतर बनाने में भारत की अहम भूमिका???

UNGA 81 में OneSCD लॉन्च, सिकल सेल केयर में भारत की अहम भूमिका....

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र (UNGA 81) के दौरान भारत ने OneSCD नामक वैश्विक साझेदारी की लॉन्चिंग में सह-मेजबान की भूमिका निभाई। इस पहल का उद्देश्य सिकल सेल डिजीज से प्रभावित लोगों के लिए समान, सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देना है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान सिकल सेल डिजीज (Sickle Cell Disease) के खिलाफ वैश्विक स्तर पर सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई। 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में OneSCD: A Global Partnership to Advance Equity and Transform Sickle Cell Care को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया। भारत ने इस वैश्विक साझेदारी की लॉन्चिंग में सह-मेजबान की भूमिका निभाई।

क्या है OneSCD ग्लोबल पार्टनरशिप?

OneSCD का उद्देश्य सिकल सेल डिजिज की रोकथाम, समय पर जांच, उपचार और निरंतर देखभाल के क्षेत्र में देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इस साझेदारी के जरिए उन देशों और समुदायों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, जहां सिकल सेल बीमारी का बोझ अधिक है और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक पहुंच सीमित है।

इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य सिकल सेल केयर में मौजूद वैश्विक असमानताओं को कम करना है। OneSCD के तहत सरकारों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, स्वास्थ्य संस्थानों और अन्य भागीदारों को एक साझा मंच पर लाकर टिकाऊ वित्तीय सहयोग, व्यापक देखभाल और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाएगा।

भारत ने निभाई सह-मेजबान की भूमिका

भारत ने OneSCD की लॉन्चिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए सिकल सेल डिजिज के खिलाफ अपने राष्ट्रीय प्रयासों और अनुभव को वैश्विक मंच पर साझा किया। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने भारत के प्रयासों को सामने रखा। उन्होंने बताया कि भारत सिकल सेल बीमारी के खिलाफ बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग, जल्द निदान, काउंसलिंग, उपचार और फॉलो-अप सेवाओं को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने पर काम कर रहा है।

भारत ने यह भी रेखांकित किया कि सिकल सेल से पीड़ित किसी व्यक्ति को उसके निवास स्थान या सामाजिक-आर्थिक स्थिति के कारण समय पर और निरंतर इलाज से वंचित नहीं होना चाहिए।

2047 तक सिकल सेल उन्मूलन का लक्ष्य

भारत ने वर्ष 2023 में National Sickle Cell Anaemia Elimination Mission शुरू किया था। इसका व्यापक लक्ष्य वर्ष 2047 तक सिकल सेल डिजिज को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करना है। मिशन के तहत आबादी स्तर पर स्क्रीनिंग और बीमारी की जल्द पहचान पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

इसके अलावा भारत सिकल सेल मरीजों के लिए किफायती पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स और हाइड्रॉक्सीयूरिया जैसी उपचार सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। सरकार ने बीमारी के लिए स्वदेशी जीन-एडिटिंग थेरेपी पर चल रहे शोध का भी उल्लेख किया है।

OneSCD में कौन-कौन से वैश्विक साझेदार शामिल?

OneSCD की पहल में कई देशों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थाओं को जोड़ा गया है। इनमें नाइजीरिया सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), UNICEF, Africa CDC, World Coalition on Sickle Cell Disease और St. Jude Children’s Research Hospital जैसे साझेदार शामिल हैं।

इस साझेदारी के जरिए सिकल सेल डिजिज से जुड़े ज्ञान, संसाधनों और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर तरीके से साझा करने की कोशिश की जाएगी।

सिकल सेल डिजिज क्यों है बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य चुनौती?

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार सिकल सेल डिजिज से दुनिया में 7 मिलियन से अधिक लोग प्रभावित हैं। इनमें तीन-चौथाई से अधिक लोग उप-सहारा अफ्रीका में रहते हैं। UN के OneSCD कार्यक्रम के अनुसार इलाज न मिलने की स्थिति में प्रभावित बच्चों में मृत्यु का जोखिम बेहद अधिक हो सकता है। वहीं उच्च आय वाले देशों में शुरुआती पहचान और बेहतर उपचार के कारण प्रभावित लोगों की वयस्क अवस्था तक जीवित रहने की दर काफी अधिक है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी सिकल सेल डिजिज को दुनिया में सबसे आम आनुवंशिक रक्त विकारों में से एक बताया है। मई 2026 में WHO ने बच्चों और किशोरों में सिकल सेल डिजिज के निदान, रोकथाम और उपचार के लिए अपनी पहली समेकित गाइडलाइन जारी की।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है OneSCD?

भारत में सिकल सेल डिजिज विशेष रूप से कुछ आदिवासी और अन्य उच्च-जोखिम वाली आबादी में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य चुनौती रही है। ऐसे में OneSCD जैसे वैश्विक मंच से भारत को दूसरे देशों के अनुभव, शोध और उपचार संबंधी प्रगति साझा करने तथा वैश्विक सहयोग को मजबूत करने का अवसर मिलता है।

भारत की राष्ट्रीय सिकल सेल मिशन के अनुभव को भी उन देशों के लिए उपयोगी माना जा सकता है, जो बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से बीमारी की पहचान एवं उपचार व्यवस्था को मजबूत करना चाहते हैं।

वैश्विक सहयोग पर जोर

OneSCD का मुख्य संदेश यह है कि सिकल सेल डिजिज से निपटने के लिए केवल किसी एक देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। बीमारी की जांच, उपचार, दवाओं की उपलब्धता, विशेषज्ञ देखभाल, शोध और वित्तीय संसाधनों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।

UNGA 81 के दौरान OneSCD की लॉन्चिंग इसी दिशा में एक वैश्विक समन्वय तंत्र के रूप में सामने आई है। इसका लक्ष्य बिखरे हुए प्रयासों को बेहतर तरीके से जोड़ना और सिकल सेल से प्रभावित लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाना है।

निष्कर्ष

UNGA 81 के दौरान OneSCD ग्लोबल पार्टनरशिप की शुरुआत सिकल सेल डिजिज के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत की सह-मेजबानी और उसके 2047 तक सिकल सेल एनीमिया को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या से खत्म करने के लक्ष्य ने इस पहल में भारत की भूमिका को प्रमुखता दी है। आने वाले समय में OneSCD के जरिए बेहतर स्क्रीनिंग, शुरुआती निदान, किफायती उपचार और निरंतर देखभाल तक पहुंच बढ़ाने पर जोर रहेगा।

Back to top button