एक छोटी सी टाइपिंग गलती से 3.25 लाख रुपये गलत खाते में पहुंच गए और महिला को करीब सात महीने तक अपनी रकम के लिए संघर्ष करना पड़ा???
गलत खाता नंबर से 3.25 लाख ट्रांसफर, कर्नाटक हाई कोर्ट ने बैंक से कराई भरपाई....
Karnataka High Court News: बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करते समय एक छोटी सी गलती कितनी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है, इसका एक मामला कर्नाटक से सामने आया है। एक महिला ने अपने पिता को 3.25 लाख रुपये भेजने के लिए RTGS किया, लेकिन खाता नंबर के आखिरी चार अंक गलत दर्ज हो गए। रकम एक दूसरे, निष्क्रिय बैंक खाते में पहुंच गई। करीब सात महीने की कानूनी लड़ाई के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने बैंक को महिला की रकम वापस करने का आदेश दिया।
पिता को भेजने थे 3.25 लाख रुपये
मामला कर्नाटक की रहने वाली नुजैबा जलील से जुड़ा है। दिसंबर 2025 में उन्होंने अपने पिता के बैंक खाते में 3.25 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए RTGS का इस्तेमाल किया था।
पैसे भेजते समय उनसे बैंक खाता नंबर दर्ज करने में गलती हो गई। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने अपने पिता के खाते के आखिरी चार अंक गलत टाइप कर दिए, जिसके कारण रकम किसी दूसरे खाते में चली गई।
रकम पहुंची Standard Engineering Works के खाते में
गलत खाता नंबर की वजह से 3.25 लाख रुपये Standard Engineering Works के एक बैंक खाते में क्रेडिट हो गए। खास बात यह थी कि यह खाता निष्क्रिय यानी dormant account था।
महिला को जब अपनी गलती का पता चला तो उन्होंने बैंक से संपर्क किया और रकम वापस अपने खाते में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। लेकिन बैंक के सामने एक बड़ी कानूनी और नियामकीय समस्या थी।
बैंक ने कहा- लाभार्थी की सहमति जरूरी
बैंक ने महिला को बताया कि गलत खाते में पहुंची रकम को वापस करने के लिए संबंधित लाभार्थी यानी उस खाते के धारक की सहमति जरूरी है।
समस्या यह थी कि जिस खाते में पैसा गया था, उसके धारक से संपर्क नहीं हो पा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक ने अदालत में भी बताया कि लाभार्थी की ओर से No Objection मिलने पर रकम वापस की जा सकती है।
इस वजह से महिला को अपनी रकम वापस पाने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
RBI Ombudsman से भी नहीं मिली राहत
हाई कोर्ट जाने से पहले नुजैबा जलील ने RBI Ombudsman के सामने भी अपनी शिकायत रखी थी। लेकिन वहां से भी उन्हें तत्काल राहत नहीं मिल सकी।
रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा नियामकीय व्यवस्था में गलत खाते में ट्रांसफर हुई रकम को वापस करने के लिए लाभार्थी की सहमति से जुड़ी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। चूंकि संबंधित खाताधारक से संपर्क नहीं हो पा रहा था, मामला आगे नहीं बढ़ सका।
आखिरकार हाई कोर्ट पहुंचा मामला
जब बैंकिंग प्रक्रिया के जरिए रकम वापस नहीं मिली तो महिला ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिका में महिला की ओर से तर्क दिया गया कि उनकी अपनी रकम गलत खाते में जाने के बाद भी उन्हें उससे वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 300A में मिले संपत्ति के अधिकार से भी जोड़ा।
मामले की सुनवाई जस्टिस सी.एम. पूनाचा की अदालत में हुई।
कोर्ट ने बैंक को दिया रकम लौटाने का आदेश
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि जिस खाते में पैसा गया था, उसके धारक तक पहुंचना संभव नहीं हो रहा था।
रिपोर्ट के अनुसार, Standard Engineering Works को जारी किया गया नोटिस भी वापस आ गया। डाक विभाग की ओर से नोटिस पर “Left without instructions” टिप्पणी की गई थी।
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने बैंक को महिला की रकम वापस करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि 3.25 लाख रुपये महिला के खाते में दोबारा ट्रांसफर किए जाएं और यह काम आदेश की प्रति मिलने के तीन दिनों के भीतर किया जाए।
सात महीने चली पैसे वापस पाने की कोशिश
महिला ने 17 दिसंबर 2025 को यह रकम ट्रांसफर की थी। हाई कोर्ट के आदेश तक वह करीब सात महीने तक अपनी रकम वापस पाने की कोशिश करती रहीं।
यह मामला बताता है कि डिजिटल बैंकिंग और RTGS जैसी सुविधाओं से पैसे भेजना भले ही आसान हो गया हो, लेकिन एक गलत अंक पूरी रकम को गलत खाते में पहुंचा सकता है और उसे वापस पाने में लंबा समय लग सकता है।
इस मामले से बैंक ग्राहकों को क्या सीख मिलती है?
इस मामले के बाद बैंक ग्राहकों के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हो जाती हैं।
1. खाता नंबर दो बार जांचें
NEFT, RTGS या किसी अन्य बैंक ट्रांसफर से पहले अकाउंट नंबर को ध्यान से जांचें। खासकर आखिरी कुछ अंकों को जरूर मिलाएं।
2. IFSC भी जांचें
सिर्फ अकाउंट नंबर ही नहीं, बल्कि IFSC Code और लाभार्थी का नाम भी सही है या नहीं, यह सुनिश्चित करना चाहिए।
3. बड़ी रकम भेजने में जल्दबाजी न करें
3.25 लाख जैसी बड़ी रकम भेजते समय कुछ सेकंड अतिरिक्त लेकर सभी विवरण दोबारा जांचना बेहतर है।
4. गलती होते ही बैंक को बताएं
अगर पैसा गलत खाते में चला गया है तो तुरंत अपने बैंक को सूचना दें। बैंक को ट्रांजेक्शन की तारीख, रकम और संदर्भ संख्या सहित पूरी जानकारी दें।
Bank of Baroda और अन्य बैंकों की ग्राहक गाइडेंस भी गलत खाते में पैसा जाने पर तुरंत अपने बैंक को सूचित करने की सलाह देती है।
हाई कोर्ट का फैसला क्यों अहम है?
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला केवल एक गलत बैंक ट्रांसफर का नहीं था, बल्कि गलत खाते में पहुंची रकम और उसे वापस पाने की प्रक्रिया से जुड़ा था।
महिला की गलती के बावजूद, अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए बैंक को रकम वापस करने का रास्ता दिया। खासकर तब, जब संबंधित लाभार्थी से संपर्क नहीं हो पा रहा था और पैसा एक dormant account में पड़ा था।
निष्कर्ष
एक छोटी सी टाइपिंग गलती से 3.25 लाख रुपये गलत खाते में पहुंच गए और महिला को करीब सात महीने तक अपनी रकम के लिए संघर्ष करना पड़ा। RBI Ombudsman से राहत नहीं मिलने के बाद मामला कर्नाटक हाई कोर्ट पहुंचा। अदालत ने परिस्थितियों को देखते हुए बैंक को महिला के खाते में 3.25 लाख रुपये दोबारा ट्रांसफर करने का आदेश दिया। यह मामला डिजिटल बैंकिंग में खाता नंबर और बैंक डिटेल्स को दोबारा जांचने की अहमियत भी बताता है।





