अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल बाद जम्मू-कश्मीर में विकास, सुरक्षा, पर्यटन और राजनीति में क्या बदलाव आए? पढ़ें पूरी रिपोर्ट????

अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल बाद जम्मू-कश्मीर कितना बदला? जानिए पूरी रिपोर्ट

अनुच्छेद 370 हटने से जम्मू-कश्मीर में क्या बदला? 7 साल बाद घाटी के हालात कैसे हैं, पाकिस्तान के लिए क्यों बना बड़ा झटका?

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Article 370 After 7 Years: 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A के अधिकांश प्रावधानों को समाप्त कर राज्य का विशेष दर्जा खत्म कर दिया था। इसके साथ ही तत्कालीन राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित कर दिया गया। इस फैसले को कई राजनीतिक दलों और संगठनों ने चुनौती दी, लेकिन दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने इसे संवैधानिक रूप से वैध ठहराते हुए केंद्र सरकार के फैसले पर मुहर लगा दी। साथ ही अदालत ने जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में कदम उठाने की भी बात कही थी।

अब इस फैसले को सात साल पूरे हो चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इन सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर कितना बदला है और पाकिस्तान के लिए यह दिन क्यों अब भी सबसे बड़ा राजनीतिक जख्म माना जाता है।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद सबसे बड़ा बदलाव

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में भारतीय संविधान पूरी तरह लागू हो गया। राज्य का अलग संविधान और अलग झंडा समाप्त हो गया। संसद द्वारा बनाए गए सभी केंद्रीय कानून सीधे जम्मू-कश्मीर में लागू होने लगे। महिलाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और अन्य वर्गों से जुड़े कई केंद्रीय कानूनों का लाभ भी लोगों तक पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

11 दिसंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ पूर्ण संवैधानिक एकीकरण संविधान की मूल भावना के अनुरूप है। अदालत ने अनुच्छेद 370 को अस्थायी प्रावधान माना और केंद्र सरकार द्वारा किए गए बदलाव को वैध ठहराया। साथ ही चुनाव और राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश भी दिया था।

विकास की रफ्तार में तेजी

2019 के बाद केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे पर बड़े स्तर पर निवेश किया। नई सड़कें, सुरंगें, रेलवे परियोजनाएं, स्वास्थ्य सुविधाएं और शिक्षा संस्थानों का विस्तार हुआ। दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज चेनाब रेल ब्रिज और कई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं इस बदलाव की बड़ी पहचान बनीं। निवेश प्रस्तावों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

पर्यटन ने बनाया नया रिकॉर्ड

पर्यटन क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। श्रीनगर, गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और अन्य पर्यटन स्थलों पर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ी। होटल उद्योग, टैक्सी सेवाओं, स्थानीय हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों को इसका सीधा लाभ मिला।

सुरक्षा हालात में क्या बदलाव आया?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले सात वर्षों में आतंकवादी घटनाओं, स्थानीय आतंकवादी भर्ती और हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अब भी सीमा पार से घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों की आशंका को देखते हुए लगातार सतर्क रहती हैं। सातवीं वर्षगांठ पर भी पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया भी आगे बढ़ी

अनुच्छेद 370 हटने के बाद पंचायत, जिला विकास परिषद (DDC) और विधानसभा चुनाव कराए गए। जम्मू-कश्मीर में निर्वाचित सरकार बनने के बावजूद पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग अब भी राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है। कई क्षेत्रीय दल आज भी अनुच्छेद 370 की बहाली और राज्य का दर्जा लौटाने की मांग कर रहे हैं।

पाकिस्तान के लिए क्यों है बड़ा झटका?

पाकिस्तान ने 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने का कड़ा विरोध किया था और इसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मुद्दा बनाने की कोशिश की। हालांकि भारत लगातार इसे अपना आंतरिक मामला बताता रहा। दूसरी ओर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आर्थिक संकट, महंगाई, बिजली की कमी और जनविरोध की खबरें सामने आती रही हैं। इसी वजह से भारतीय पक्ष अक्सर जम्मू-कश्मीर और PoK के विकास की तुलना करता है।

राजनीतिक बहस अब भी जारी

जहां केंद्र सरकार और भाजपा अनुच्छेद 370 हटाने को राष्ट्रीय एकीकरण, विकास और सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक फैसला बताती है, वहीं नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी सहित कई क्षेत्रीय दल इसे जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों पर असर डालने वाला कदम मानते हैं। सातवीं वर्षगांठ पर भी घाटी में अलग-अलग राजनीतिक दलों ने विरोध और समर्थन दोनों तरह के कार्यक्रम आयोजित किए।

सात साल बाद घाटी की तस्वीर

सात वर्षों बाद जम्मू-कश्मीर की तस्वीर पहले की तुलना में कई मायनों में बदली हुई दिखाई देती है। बुनियादी ढांचे, पर्यटन, निवेश और प्रशासनिक एकीकरण के क्षेत्र में बदलाव दर्ज किए गए हैं। वहीं राज्य का दर्जा बहाल करने, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक पहचान जैसे मुद्दों पर बहस अभी भी जारी है। यही वजह है कि अनुच्छेद 370 का मुद्दा आज भी केवल संवैधानिक नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है।

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